ऑस्ट्रेलिया दौरे पर खुद को ही चुनौती देना चाहते हैं जसप्रीत बुमराह

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर खुद को ही चुनौती देना चाहते हैं जसप्रीत बुमराह

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बहुप्रतीक्षित तीनों फॉर्मेट की सीरीज शुक्रवार से शुरू हो रही है। वनडे सीरीज का पहला मैच सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में 27 नवंबर को खेला जाएगा। तीनों फॉर्मेट की क्रिकेट में भारत के तेज गेंदबाजी आक्रमण की इकाई का नेतृत्व फिर से जसप्रीत बुमराह करने वाले हैं। कप्तान विराट कोहली उनसे पारी की शुरुआत के साथ-साथ डेथ ओवरों में भी गेंदबाजी कराने वाले हैं। उधर, 26 वर्षीय खिलाड़ी बुमराह के लिए गेंदबाजी आक्रमण का नेतृत्व करने के लिए यह काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन बुमराह कहते हैं कि उन्हें चुनौतियां पसंद हैं, और दमदार टीम के खिलाफ खेलना उनको अच्छा लगता है।

जसप्रीत बुमराह ने कहा, "यह दौरा दिलचस्प होगा। जब आप ऑस्ट्रेलिया जाते हैं तो हमेशा एक चुनौती होती है और यह एक अच्छी तरह से लड़ी जाने वाली सीरीज है। आप इसके लिए तत्पर हैं, क्योंकि आप हमेशा सर्वश्रेष्ठ टीम के खिलाफ खेलना चाहते हैं, आप हमेशा अपने आप को चुनौती देना चाहते हैं और दबाव की स्थिति में रहना चाहते हैं।" 2018-19 में भारत की ऐतिहासिक सीरीज जीत का हिस्सा रहे बुमराह से हर किसी को उम्मीद है। खुद बुमराह इस चुनौती को स्वीकार कर रहे हैं। बुमराह ने पिछली बार सीरीज के 4 मैचों में 21 विकेट चटकाए थे, जिसमें वे नाथन लियोन के साथ संयुक्त रूप से सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज थे।

उन्होंने आगे कहा, "कई नई रोमांचक चीजें भी हैं। आपके पास गुलाबी गेंद का टेस्ट मैच है। उम्मीद है कि सबकुछ ठीक हो जाएगा और हमारे पास अच्छा समय होगा।" वास्तव में, बुमराह का यह भी मानना ​​है कि कोरोना वायरस की वजह से गेंद को चमकाने के लिए लार के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने से सफेद गेंद की तुलना में पांच दिवसीय प्रारूप में खेलने के लिए एक बड़ी भूमिका होगी। बुमराह ने कहा है कि उनके लिए लाल गेंद के प्रारूप का एक बहुत बड़ा कारक है।


आखिरकार तपकर सोना बन ही गए रिषभ पंत, बहुत झेलनी पड़ी थी आलोचना

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सिडनी टेस्ट के पांचवें दिन से एक दिन पहले की बात है, रिषभ पंत की कोहनी में चोट थी और परिस्थिति कुछ ऐसी थी कि उन्हें मैच के पांचवें दिन मैदान पर उतरना था। तब पंत थ्रोडाउन स्पेशलिस्ट के साथ घंटों तक अभ्यास कर रहे थे। थ्रोडाउन कर रहे नुवान पूरी गति से बाउंसर नहीं फेंक रहे थे। पंत ने कहा पूरी गति से डालो, मैदान पर ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज ऐसी धीमी गेंद नहीं फेंकेंगे। नुवान को लग रहा था कि कहीं पंत को चोट नहीं लग जाए, लेकिन पंत लगातार कहते दिखे, और तेज डालो, और तेज डालो। पंत उस मैच में 97 रन बनाकर आउट हुए थे और उस टेस्ट को जिताने से कुछ दूर रह गए थे, लेकिन मंगलवार को वह पहली बार कोई टेस्ट मैच जिताकर नाबाद लौटे। इस आठ दिन के अंदर नादान रिषभ, नायाब पंत बन गया।

सिडनी में 97 रन पर आउट होने के बाद जब पंत ने अपने कोच तारक सिन्हा को फोन किया, तो वह काफी निराश थे। सिन्हा ने कहा कि कभी-कभी तुम्हें खराब गेंदों को छोड़ना भी होगा। पंत का जवाब था मैं खराब गेंदों को छोड़ नहीं सकता। दरअसल, अपने करियर के शुरुआती दिनों से पंत ऐसे ही हैं। उनके अंदर युवराज सिंह जैसे छक्के लगाने की क्षमता के साथ फौलादी इरादे भी हैं। अपने तेज तर्रार शॉट की वजह से ही वह राहुल द्रविड़ के पसंदीदा बने थे और इन्हीं शॉट चयन की वजह से पंत का करियर डूबता जा रहा था। वर्ष 2020 आते-आते वह अपने पसंदीदा प्रारूप (टी-20) से बाहर हो गए थे। वनडे टीम से भी निकाले गए और टेस्ट टीम में भी पहली पसंद नहीं रहे।


पंत की मदद इस मामले में कोई दूसरा नहीं कर सकता था। पंत की लड़ाई खुद से थी। यह लड़ाई इतनी आसान भी नहीं रही, क्योंकि वीरेंद्र सहवाग भी अपने शॉट चयन की वजह से विकेट खो बैठते थे और आलोचना झेलते थे, लेकिन पंत के साथ यह बार-बार होने लगा। कई बड़े मौकों पर होने लगा। पंत भी आम से खास बनने का सपना देखते आए, लेकिन उनके सपने भी बड़े थे। वह एमएस धौनी की तरह विजयी बाउंड्री लगाकर बड़ा मैच जिताना चाहते थे। ऑस्ट्रेलिया में अभ्यास मैच में बड़ी पारी खेलने के बावजूद पहले टेस्ट में पहली पसंद रिद्धिमान साहा बने।


दिल्ली की सर्दियों में गुरुद्वारे में रात बिताकर टेस्ट कैप हासिल करने वाले पंत अंदर से टूटने वालों में से कहां थे। सिडनी टेस्ट और गाबा टेस्ट में पंत के शॉट लगाने के तरीकों में पहले से कुछ भी अलग नहीं था, अलग था तो उनके अंदर का संकल्प।

2016 में उनके साथ अंडर-19 विश्व कप खेलने वाले तेज गेंदबाज शुभम मावी ने बताया कि वह क्लीन हिटर रहे हैं। कभी भी कितना भी दबाव हो वह अपना ही खेल खेलता था। घरेलू स्तर पर वह तीन बार फेल हुआ तो अगले मैच में उसकी बड़ी पारी सब भुला देती थी। राहुल द्रविड़ सर को भी उसकी यही खासियत पसंद थी लेकिन भारतीय टीम के साथ खेलते हुए उसकी समस्या यही थी कि उसके प्राकृतिक खेल की ही आलोचना होने लगी, जिसे वह बदल नहीं सकता, लेकिन मंगलवार को उसने अपनी इसी काबिलियत से अपने अंदर के पंत को हरा दिया।

रिषभ पंत के कोच तारक सिन्हा ने कहा है, "पंत ने अब अपने सभी आलोचकों को शांत कर दिया। टीम ने उसे मौका देकर दिखाया कि वह उस पर पूरा विश्वास करती है। मुझे पूरा विश्वास है कि उसकी विकेटकीपिंग भी बेहतर होगी। जब आप अपनी जगह को लेकर संतुष्ट हो जाओ और सभी कहें कि आप अच्छे हो तो बाकी चीजें खुद ठीक होने लगती हैं।"


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