अंडरटेकर के फैंस को तगड़ा झटका: WWE यूनिवर्स से ली विदाई

अंडरटेकर के फैंस को तगड़ा झटका: WWE यूनिवर्स से ली विदाई

नई दिल्ली : रेसलिंग लेजेंड द अंडरटेकर को तो सभी लोग जानते होंगे। आपको बता दें कि इन्होंने डब्ल्यूडब्ल्यूई यूनिवर्स को अलविदा कह दिया है। आपको बता दें कि रेसलिंग के अंडरटेकर ने सर्वाइवर सीरीज के दौरान विदाई ली है। 55 साल के अंडरटेकर ने डब्ल्यूडब्ल्यूई से अलविदा ले लिया है। इन्होंने रविवार को अपनी कॉस्ट्यूम को आखरी बार पहन कर रिंग में कदम रखा।

अंडरटेकर का असली नाम
रेसलिंग के अंडरटेकर का जन्म 24 मार्च 1965 को ह्यूस्टन में हुआ था। डब्ल्यूडब्ल्यूई यूनिवर्स में अंडरटेकर ने 22 नवंबर 1990 में इस रिंग में शामिल हुए थे। आपको बता दें कि इनका असली नाम मार्क विलियम कालावे है। यह रिंग में अंडरटेकर के नाम से जाने जाते हैं।

करियर की शुरुआत
डब्ल्यूडब्ल्यूई के एनाउंसर ने रेसलिंग के द अंडरटेकर के फेयरवेल की घोषणा की। इसके बाद अंडरटेकर ने रिंग में शानदार एंट्री की। इस फेयरवेल में इन्होंने अपने करियर के बारे में बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उनका समय आ चुका है। इसके साथ उन्होंने इस रिंग से अलविदा लिया। फैन्स ने थैंक यू टेकर कह कर विदाई दी। इस दौरान टेकर भावुक हो गए थे ।

WWE Survivor Series
अंडरटेकर ने रेसलिंग की रिंग से अलविदा कह दिया है। आपको बता दें कि अंडरटेकर के इस फेयरवेल को WWE Survivor Series पर अंतिम बार दिखाया गया है। टेकर इस दौरान भावुक हो गए। हाल ही में एक इंटरव्यू में अंडरटेकर ने कहा था कि उन्हें अपने करियर पर गर्व है। इन्होंने बताया कि इस करियर में काफी लंबा समय दिया है। आपको बता दें कि उन्होंने इस करियर में अपना 30 साल का यादगार लम्हा गुजारा है।


आखिरकार तपकर सोना बन ही गए रिषभ पंत, बहुत झेलनी पड़ी थी आलोचना

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सिडनी टेस्ट के पांचवें दिन से एक दिन पहले की बात है, रिषभ पंत की कोहनी में चोट थी और परिस्थिति कुछ ऐसी थी कि उन्हें मैच के पांचवें दिन मैदान पर उतरना था। तब पंत थ्रोडाउन स्पेशलिस्ट के साथ घंटों तक अभ्यास कर रहे थे। थ्रोडाउन कर रहे नुवान पूरी गति से बाउंसर नहीं फेंक रहे थे। पंत ने कहा पूरी गति से डालो, मैदान पर ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज ऐसी धीमी गेंद नहीं फेंकेंगे। नुवान को लग रहा था कि कहीं पंत को चोट नहीं लग जाए, लेकिन पंत लगातार कहते दिखे, और तेज डालो, और तेज डालो। पंत उस मैच में 97 रन बनाकर आउट हुए थे और उस टेस्ट को जिताने से कुछ दूर रह गए थे, लेकिन मंगलवार को वह पहली बार कोई टेस्ट मैच जिताकर नाबाद लौटे। इस आठ दिन के अंदर नादान रिषभ, नायाब पंत बन गया।

सिडनी में 97 रन पर आउट होने के बाद जब पंत ने अपने कोच तारक सिन्हा को फोन किया, तो वह काफी निराश थे। सिन्हा ने कहा कि कभी-कभी तुम्हें खराब गेंदों को छोड़ना भी होगा। पंत का जवाब था मैं खराब गेंदों को छोड़ नहीं सकता। दरअसल, अपने करियर के शुरुआती दिनों से पंत ऐसे ही हैं। उनके अंदर युवराज सिंह जैसे छक्के लगाने की क्षमता के साथ फौलादी इरादे भी हैं। अपने तेज तर्रार शॉट की वजह से ही वह राहुल द्रविड़ के पसंदीदा बने थे और इन्हीं शॉट चयन की वजह से पंत का करियर डूबता जा रहा था। वर्ष 2020 आते-आते वह अपने पसंदीदा प्रारूप (टी-20) से बाहर हो गए थे। वनडे टीम से भी निकाले गए और टेस्ट टीम में भी पहली पसंद नहीं रहे।


पंत की मदद इस मामले में कोई दूसरा नहीं कर सकता था। पंत की लड़ाई खुद से थी। यह लड़ाई इतनी आसान भी नहीं रही, क्योंकि वीरेंद्र सहवाग भी अपने शॉट चयन की वजह से विकेट खो बैठते थे और आलोचना झेलते थे, लेकिन पंत के साथ यह बार-बार होने लगा। कई बड़े मौकों पर होने लगा। पंत भी आम से खास बनने का सपना देखते आए, लेकिन उनके सपने भी बड़े थे। वह एमएस धौनी की तरह विजयी बाउंड्री लगाकर बड़ा मैच जिताना चाहते थे। ऑस्ट्रेलिया में अभ्यास मैच में बड़ी पारी खेलने के बावजूद पहले टेस्ट में पहली पसंद रिद्धिमान साहा बने।


दिल्ली की सर्दियों में गुरुद्वारे में रात बिताकर टेस्ट कैप हासिल करने वाले पंत अंदर से टूटने वालों में से कहां थे। सिडनी टेस्ट और गाबा टेस्ट में पंत के शॉट लगाने के तरीकों में पहले से कुछ भी अलग नहीं था, अलग था तो उनके अंदर का संकल्प।

2016 में उनके साथ अंडर-19 विश्व कप खेलने वाले तेज गेंदबाज शुभम मावी ने बताया कि वह क्लीन हिटर रहे हैं। कभी भी कितना भी दबाव हो वह अपना ही खेल खेलता था। घरेलू स्तर पर वह तीन बार फेल हुआ तो अगले मैच में उसकी बड़ी पारी सब भुला देती थी। राहुल द्रविड़ सर को भी उसकी यही खासियत पसंद थी लेकिन भारतीय टीम के साथ खेलते हुए उसकी समस्या यही थी कि उसके प्राकृतिक खेल की ही आलोचना होने लगी, जिसे वह बदल नहीं सकता, लेकिन मंगलवार को उसने अपनी इसी काबिलियत से अपने अंदर के पंत को हरा दिया।

रिषभ पंत के कोच तारक सिन्हा ने कहा है, "पंत ने अब अपने सभी आलोचकों को शांत कर दिया। टीम ने उसे मौका देकर दिखाया कि वह उस पर पूरा विश्वास करती है। मुझे पूरा विश्वास है कि उसकी विकेटकीपिंग भी बेहतर होगी। जब आप अपनी जगह को लेकर संतुष्ट हो जाओ और सभी कहें कि आप अच्छे हो तो बाकी चीजें खुद ठीक होने लगती हैं।"


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