कोरोना वीरों को काशी की बेटी ने अनोखे अंदाज में किया सलाम

कोरोना वीरों को काशी की बेटी ने अनोखे अंदाज में किया सलाम

कोविड-19 वॉरियर्स (Corona Warriors) के जज्बे को सलाम करने के लिए काशी की बेटी ने अनोखा उपाय अपनाया है वाराणसी (Varanasi) की रहने वाली राखी ने लकड़ी की टुकड़ियों से खास तरह के मेडल तैयार किए हैं खास बात ये है कि ये मेडल किसी खास शख्स के लिए नहीं बल्कि उन आम लोगों के लिए हैं जिन्होंने कोविड-19 के समय छोटी-छोटी चीजों से लोगों की आवश्यकता को पूरा किया था मेडल तैयार करने के साथ ही राखी ने उन लोगों को ये मेडल भी भेंट किए हैं इसमें रिक्शा, सब्जी विक्रेता,डिलीवरी बॉय, ऑटो चालक, किसान जैसे आम लोग शामिल हैं पूरे डेढ़ वर्ष की मेहनत के बाद राखी ने इन मेडल्स को तैयार किया है कोविड-19 के समय जिस समय लोग अपने घरों में थे, उस वक्‍त वाराणसी की राखी कोविड-19 वीरों का लिए ये मेडल तैयार कर रही थीं

राखी मूलतः बिहार की रहने वाली हैं, लेकिन बीते कुछ वर्षों से वो महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में पढ़ाई करने के साथ ही वाराणसी में रह रही हैं उन्‍होंने बताया कि कोविड-19 के समय डॉक्टर्स और पुलिसवालों को तो हर किसी ने सम्मानित किया, लेकिन उसी समय कई ऐसे आम लोग भी थे जिन्होंने हमारी सहायता की और स्वयं की जान जोखिम में रखकर हमारे घर आवश्यकता के सामान को पहुंचाया उन्हीं शूरवीरों के लिए मैंने ये कोशिश किया है, ताकि लोग उनके सहयोग को भी जान और समझ सकें

ऐसे मिली प्रेणना
राखी ने बताया कि उनको इसकी प्रेणना डेनमार्क के रहने वाले मैडम ईगर माग्रेट लार्सन से मिली उन्होंने भी 2018 में कुछ खास लोगों के लिए बीएचयू (BHU) में इसी तरह की प्रदर्शनी लगाई थी, जिसके बाद राखी ने ये ठाना कि वो भी समाज के लिए बेहतर काम करने वालों को सम्मानित करने का कोशिश करेंगी

यूरेशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम हुआ दर्ज
वाराणसी की बेटी के इस अनोखे कोशिश की चर्चा अब शहर में हो रही है राखी की इस मेहनत को उस समय हौसला मिल गया जब यूरेशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड बुक में उनका नाम दर्ज हुआ, जिसके बाद उनके घर के साथ ही पूरे यूनिवर्सिटी में खुशी का माहौल है

रिक्शा चालकों ने भी की तारीफ
राखी ने जिन 501 शख्स के लिए मेडल तैयार किए हैं उसमें वाराणसी की टेरो कार्ड रीडर नेहा भी शामिल हैं नेहा ने बताया कि राखी का ये कोशिश बहुत सराहनीय है टेलीफोन पर वार्ता में रिक्शा चालक राकेश कुमार ने बताया कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उन्हें भी मेडल देकर सम्मानित किया जाएगा


भिखारी के रूप में घूम रहे एक बुजुर्ग की पहचान हुई गुजरात के सेवानिवृत्त प्रबंधक के रूप में

भिखारी के रूप में घूम रहे एक बुजुर्ग की पहचान हुई गुजरात के सेवानिवृत्त प्रबंधक के रूप में

एटा में भिखारी के रूप में घूम रहे एक बुजुर्ग की पहचान गुजरात के सेवानिवृत्त प्रबंधक के रूप में हुई है. उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं बताई जा रही. पुलिस ने उन्हें कोतवाली नगर में रखा है. उनके गृह जनपद में परिजनों को टेलीफोन कर जानकारी दी गई है. कई दिन से एक आदमी रोडवेज बस स्टैंड के आसपास भीख मांगकर पेट भरता था. रविवार को उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो उसे गुजरात के लोगों ने पहचान लिया. इसके बाद क्षेत्रीय पुलिस को सूचना दी. 

बुजुर्ग ने परिजनों के बारे में दी जानकारी 

पुलिस बुजुर्ग को थाने ले आई. पूछताछ में बुजुर्ग ने अपने घर का पता और परिजन की जानकारी और टेलीफोन नंबर बताए. जिस पर पुलिस ने टेलीफोन कर जानकारी दी. कोतवाली नगर प्रभारी रामेंद्र शुक्ला ने बताया कि एक बुजुर्ग आदमी के बारे में जानकारी मिली. बस स्टैंड पहुंचकर उन्हें थाने लाए. वह मानसिक रूप से बीमार प्रतीत हो रहे हैं. वार्ता करने के दौरान पता लगा कि वह बैंक मैनेजर पद से सेवानिवृत्त हैं. 

दो अप्रैल से थे लापता  

सेवानिवृत्त प्रबंधक द्वारा बताए गए पते पर गुजरात के जनपद नवसारी थाना क्षेत्र के गांव चिखली में संपर्क किया गया. बताया गया कि वह लापता हो गए थे. 2 अप्रैल 2022 को उनकी गुमशुदगी वहां थाने में दर्ज कराई गई है. वह गुजरात से एटा कैस पहुंचे, यह अभी पता नहीं चल सका है. बुजुर्ग के भाई ने उनका नाम दिनेश कुमार और फिर दीनू भाई पटेल बताया है. परिजन गुजरात से एटा के लिए रवाना हो गए हैं.