कानपुर के करौली बाबा में जागा राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री वाला शौक

कानपुर के करौली बाबा में जागा राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री वाला शौक

बागेश्वर धाम वाले बाबा धीरेंद्र शास्त्री के बाद ताजा-ताजा चर्चित कानपुर के संतोष सिंह भदौरिया उर्फ करौली बाबा विवादों में एक के बाद एक लगातार फंस रहे हैं, पुलिस में शिकायतों की संख्या बढ़ रही है लेकिन बाबा के शौक चढ़ते जा रहे हैं. कभी मर्डर तो कभी जमीन अतिक्रमण जैसे मुकदमा में आरोपी बने संतोष सिंह भदौरिया किसान नेता से बाबा बनने के बाद मीडिया पर पाबंदी का शौक पाल बैठे हैं.

बाबा ने फरमान जारी किया है कि मीडिया वाले कवरेज के लिए आश्रम आना चाहते हैं तो पहले का फॉर्म भरकर आश्रम के मान्यता प्राप्त पत्रकार बनें फिर आएं. शायद आपको पता ना हो लेकिन राष्ट्र में गवर्नमेंट का एक विभाग पीआईबी पत्रकारों को मान्यता देता है. राष्ट्रपति, पीएम समेत कई केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी कार्यक्रम को कवर करने के लिए पत्रकारों का पीआईबी मान्यता प्राप्त होना महत्वपूर्ण है.

राष्ट्रपति या पीएम के सरकारी कार्यक्रम में जाने के लिए किसी का पत्रकार होना काफी नहीं है, उसके पास पीआईबी कार्ड होना महत्वपूर्ण होता है. बाबा के आश्रम ने भी पीआईबी की तरह का एक फॉर्म जारी किया है जो दो पन्ने का है. जो लोग इसे भरेंगे और जिनको करौली बाबा का आश्रम मान्यता देगा वो वहां जा सकते हैं.

आश्रम में करिश्मा नहीं होने की कम्पलेन करने के बाद नोएडा के एक चिकित्सक की करौली बाबा के बंदों के हाथों पिटाई के बाद बाबा के विरूद्ध कम्पलेन की संख्या बढ़ रही है. अब मध्य प्रदेश के एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी ने कम्पलेन दी है कि रोग दूर करने के नाम पर बाबा ने पौने दो लाख रुपए का हवन करा दिया लेकिन रोग बनी रही. 

कानपुर के लोगों का बोलना है कि बाबा के आश्रम में हर रोज 3000 से अधिक भक्त आते हैं. आश्रम में प्रवेश की पर्ची 100 रुपए की आती है. आगे हर चीज का फीस तय है. हवन की फीस 3551 रुपए है लेकिन कोई हवन करे तो उसे एक नहीं नौ हवन करना होता है. यदि नौ हवन एक ही दिन करवाना है तो उसकी फीस 1 लाख 51 हजार रुपए बनती है. रुद्राभिषेक का 5100 रुपया, महामृत्युंजय जाप का 51 हजार रुपया और बाबा से इमरजेंसी में मिलना है तो 11 हजार रुपए जमा करना पड़ता है.