मनीष सिसोदिया ने लांच की दिल्ली फिल्म पॉलिसी

मनीष सिसोदिया ने लांच की दिल्ली फिल्म पॉलिसी

दिल्ली को पूरे विश्व में फिल्म निर्माण का केंद्र बनाने और वैश्विक पहचान दिलाने के लिए राज्य गवर्नमेंट ने शुक्रवार को ‘दिल्ली फिल्म पॉलिसी’ लांच कर दी. पॉलिसी लांच करते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बोला कि इससे पर्यटन को आकर्षित करने के साथ-साथ दिल्ली में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे

 सिल्वर स्क्रीन पर अधिक कवरेज के साथ दिल्ली एक ब्रांड के रूप में स्थापित होगी और लोगों में यहां की संस्कृति और कला के प्रति गर्व का रेट बढ़ेगा. उन्होंने बोला कि पॉलिसी हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म, परिवहन और सिनेमा तथा कलाकारों की दुनिया को एक साथ लाएगी.
पॉलिसी के अनुसार दिल्ली में फिल्म प्रोडक्शन के लिए गवर्नमेंट निर्माताओं को सब्सिडी देगी और फिल्म इंडस्ट्री में क्षेत्रीय लोगों को काम पर रखने के लिए भी प्रोत्साहित करेगी. दिल्ली गवर्नमेंट ने दिल्ली फिल्म फंड के लिए 30 करोड़ रुपये का आवंटन किया है. इससे दिल्ली की राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में ब्रांडिंग भी की जाएगी.
इस पॉलिसी के अनुसार सिंगल विंडो ई-फिल्म क्लीयरेंस पोर्टल भी स्थापित किया गया है, जहां फिल्म निर्माताओं को 15 दिनों के अंदर करीब 25 एजेंसियों (लोकेशन की आवश्यकता के अनुसार) की औनलाइन दी स्वीकृति जाएगी. दिल्ली टूरिज्म एंड ट्रांसपोर्टेशन डेवलपमेंट कारपोरेशन (डीटीटीडीसी) इस पूरी प्रक्रिया में नोडल एजेंसी के रूप में किरदार निभाएगा.
दिल्ली फिल्म पॉलिसी के लाभ : फिल्म पॉलिसी दिल्ली में फिल्म इंडस्ट्री इको-सिस्टम को मजबूत करने, फिल्म प्रोडक्शन और उससे संबंधित क्षेत्रों में लगे स्किल्ड वर्कफोर्स के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने में सहायता करेगा. इससे दिल्ली के होटल, रेस्तरां और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री को भी   लाभ होगा. रोजगार के नए अवसर  पैदा होंगे और अर्थव्यवस्था बेहतर होगी.

इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का होगा आयोजन, दिए जाएंगे पुरस्कार : दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवलऔर दिल्ली फिल्म एक्सीलेंस अवार्ड दिल्ली गवर्नमेंट के फिल्म पॉलिसी का खास हिस्सा है. इसके अनुसार दिल्ली का जल्द ही अपना अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल होगा और दिल्ली फिल्म एक्सीलेंस अवार्ड्स भी प्रारम्भ किया जाएगा जिसमें न सिर्फ फिल्म स्टार बल्कि क्रू के सदस्यों को भी सम्मानित  किया जाएगा.

फिल्म टूरिज्म डेस्टिनेशन बनेगी दिल्ली
‘दिल्ली फिल्म पॉलिसी 2022’ का उद्देश्य फिल्मों के माध्यम से दिल्ली को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है. इसके अतिरिक्त कलात्मक, रचनात्मक और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देना, फिल्म शूटिंग के लिए स्वीकृति की प्रक्रियाओं को आसान बनाकर इसे फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन बनाना है.
इसके अतिरिक्त दिल्ली को फिल्म टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में प्रमोट करने के लिए यहां फिल्म प्रोडक्शन से संबंधित सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा. इससे फिल्म प्रोडक्शन एजेंसी आकर्षित होंगी. दिल्ली में एक फिल्म शूटिंग प्रमोशन सेल की स्थापना की जाएगी साथ ही फिल्म प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए डेवलपमेंट सेल और फिल्म एडवाइजरी बॉडी का भी गठन किया जाएगा.

निर्माताओं को मिलेंगे विशेष फिल्म कार्ड
फिल्म निर्माताओं व उत्पादन एजेंसियों को खास डील और पैकेज देने के लिए ‘दिल्ली फिल्म कार्ड’ दिया जाएगा, जिसका मूल्य एक लाख रुपये होगा. पॉलिसी के अनुसार टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी कंपनियों को पर्यटन विभाग के साथ पैनल में रखा  जाएगा. दिल्ली फिल्म कार्ड रखने वालों को दिल्ली के भीतर यात्रा, लॉजिस्टिक्स, होटल आदि जैसे सुविधाओं में छूट मिलेगी.


मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मीटिंग जारी

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मीटिंग जारी

काशी में ज्ञानवापी मस्जिद मुद्दे व अन्य मसलों पर ऑल इण्डिया मुसलमान पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपनी एक्सिक्यूटिव कमेटी की आपात बैठक बुलाई, जिसमें कुछ बड़े निर्णय लिए गए हैं, क्योंकि मामला न्यायालय में है इसलिए बैठक में यह फैसला लिया गया है बोर्ड की लीगल कमेटी मुकदमा को लड़ने में मुसलमान पक्ष की हर संभव सहायता करेगी.

दूसरा केंद्र गवर्नमेंट सहित अन्य सियासी पार्टियों से 1991 के वर्शिप एक्ट पर उनका पक्ष जानेगी. इसके अतिरिक्त बोर्ड के मुताबिक, तमाम ढंग की बातों जनता के सामने अधूरा रखा जा रहा है. उसके लिए बोर्ड पैम्पलेट व बुक्स छपवाने का काम करेगी, जिनमें तथ्यों के साथ जानकारी हो और उन्हें जनता तक पहुंचाने का काम करेगी.

इस मीटिंग में ज्ञानवापी, टीपू सुल्तान मस्जिद समेत राष्ट्र के अन्य मौजूदा मसलों पर चर्चा की गई, बैठक करीब 2 घण्टे चली, बोर्ड के 45 सदस्य औनलाइन माध्यम से एक दूसरे से जुड़े.

सूत्रों ने आईएएनएस को जानकारी देते हुए बताया कि, न्यायालय में मुकदमा होने के चलते बोर्ड की लीगल कमिटी मुसलमान पक्ष की पूरी सहायता करेगी, वहीं मंगलवार को न्यायालय में जो बातें सामने आई हैं, उनपर काम कर आगे की सहायता करेगी. साथ ही तमाम तरह की बातों को जनता तक पहुंचाया जा रहा है जिससे बटवारा हो, लेकिन जनता के सामने हमारी आवाज पहुंच नहीं पा रही, क्योंकि लोगों को गुमराह किया जा रहा है. इसलिए हम पैम्पलेट, बुक्स व अन्य माध्यमों से डॉक्यूमेंटेशन करेंगे और जनता तक पहुंचाएंगे.

तीसरा हम केंद्र गवर्नमेंट से व अन्य सियासी पार्टियों से इस 1991 वर्शिप एक्ट कानून पर उनका पक्ष जानेंगे.

दरअसल 1991 में तत्कालीन पीएम पीवी नरसिम्हा राव गवर्नमेंट ने पूजा स्थल कानून लेकर आई थी. इस कानून के अनुसार 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता. यदि कोई ऐसा करने की प्रयास करता है तो उसे एक से तीन वर्ष तक की कारागार और जुर्माना हो सकता है. अयोध्या का मामला उस समय न्यायालय में था इसलिए उसे इस कानून से अलग रखा गया था.

इसके अतिरिक्त बैठक में मुसलमान पर्सनल लॉ बोर्ड भविष्य की कार्रवाई के बारे में निर्णय लिया गया है, बांकी बुधवार को बोर्ड विस्तार से अपने फैसलों को सबके सामने रखेगा, वहीं राष्ट्र में चल रहे मौजूदा मामलों को लेकर रणनीति बनाई गई है.

इस मुद्दे की उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई जिसमें न्यायालय ने बोला कि हम नोटिस जारी कर रहे हैं और क्षेत्रीय डीएम को आदेश देना चाहते हैं कि जहां शिवलिंग मिला है, उस स्थान को सुरक्षित रखा जाए. लेकिन, लोगों को नमाज से ना रोका जाए. दरअसल ज्ञानवापी में शिवलिंग मिलने का दावा किया गया है, लेकिन मुसलमान पक्ष का बोलना है कि यह फव्वारा है.

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई समाचार है इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है ऐसे में संबंधित समाचार को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी