मुंडका आग में 50 फीसदी से अधिक झुलसे

मुंडका आग में 50 फीसदी से अधिक झुलसे

नयी दिल्ली. मुंडका आग में घायलों को देर रात एम्स और सफदरजंग हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया. जानकारी मिली है कि घायलों में कुछ 50 प्रतिशत से अधिक झुलसे हैं जिनका इलाज बड़े हॉस्पिटल में हो सकता है. एम्स और सफदरजंग हॉस्पिटल के पास दो बड़ी बर्न यूनिट हैं. इसलिए घायलों को वहां भेजा गया है. जानकारी यह भी मिली है कि मुंडका आग में देर रात तक घायलों को पांच अस्पतालों में भर्ती किया गया है. इनमें एम्स और सफदरजंग के अतिरिक्त डीडीयू अस्पताल, संजय गांधी और रोहिणी स्थित अंबेडकर हॉस्पिटल शामिल है. सफदरजंग हॉस्पिटल से मिली जानकारी के मुताबिक उनके यहां देर रात एक 26 वर्षीय पुरुष को लाया गया है जिसकी हालत गंभीर है. यह काफी झुलस गया है. नयी दिल्ली स्थित डाक्टर राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल (आरएमएल) पहुंचे मुंडका निवासी किशन ने बताया कि वे मूल रूप से यूपी के बलिया निवासी हैं. उनकी पत्नी गीता गोदाम में आरओ पैक करने का काम करती थी. घटना के बाद से उसका कोई पता नहीं चल रहा है. उनके साथ एक स्त्री जया हैं जो अपनी तीन बहन प्रीति, अनु और मधु की तलाश में है


मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मीटिंग जारी

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मीटिंग जारी

काशी में ज्ञानवापी मस्जिद मुद्दे व अन्य मसलों पर ऑल इण्डिया मुसलमान पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपनी एक्सिक्यूटिव कमेटी की आपात बैठक बुलाई, जिसमें कुछ बड़े निर्णय लिए गए हैं, क्योंकि मामला न्यायालय में है इसलिए बैठक में यह फैसला लिया गया है बोर्ड की लीगल कमेटी मुकदमा को लड़ने में मुसलमान पक्ष की हर संभव सहायता करेगी.

दूसरा केंद्र गवर्नमेंट सहित अन्य सियासी पार्टियों से 1991 के वर्शिप एक्ट पर उनका पक्ष जानेगी. इसके अतिरिक्त बोर्ड के मुताबिक, तमाम ढंग की बातों जनता के सामने अधूरा रखा जा रहा है. उसके लिए बोर्ड पैम्पलेट व बुक्स छपवाने का काम करेगी, जिनमें तथ्यों के साथ जानकारी हो और उन्हें जनता तक पहुंचाने का काम करेगी.

इस मीटिंग में ज्ञानवापी, टीपू सुल्तान मस्जिद समेत राष्ट्र के अन्य मौजूदा मसलों पर चर्चा की गई, बैठक करीब 2 घण्टे चली, बोर्ड के 45 सदस्य औनलाइन माध्यम से एक दूसरे से जुड़े.

सूत्रों ने आईएएनएस को जानकारी देते हुए बताया कि, न्यायालय में मुकदमा होने के चलते बोर्ड की लीगल कमिटी मुसलमान पक्ष की पूरी सहायता करेगी, वहीं मंगलवार को न्यायालय में जो बातें सामने आई हैं, उनपर काम कर आगे की सहायता करेगी. साथ ही तमाम तरह की बातों को जनता तक पहुंचाया जा रहा है जिससे बटवारा हो, लेकिन जनता के सामने हमारी आवाज पहुंच नहीं पा रही, क्योंकि लोगों को गुमराह किया जा रहा है. इसलिए हम पैम्पलेट, बुक्स व अन्य माध्यमों से डॉक्यूमेंटेशन करेंगे और जनता तक पहुंचाएंगे.

तीसरा हम केंद्र गवर्नमेंट से व अन्य सियासी पार्टियों से इस 1991 वर्शिप एक्ट कानून पर उनका पक्ष जानेंगे.

दरअसल 1991 में तत्कालीन पीएम पीवी नरसिम्हा राव गवर्नमेंट ने पूजा स्थल कानून लेकर आई थी. इस कानून के अनुसार 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता. यदि कोई ऐसा करने की प्रयास करता है तो उसे एक से तीन वर्ष तक की कारागार और जुर्माना हो सकता है. अयोध्या का मामला उस समय न्यायालय में था इसलिए उसे इस कानून से अलग रखा गया था.

इसके अतिरिक्त बैठक में मुसलमान पर्सनल लॉ बोर्ड भविष्य की कार्रवाई के बारे में निर्णय लिया गया है, बांकी बुधवार को बोर्ड विस्तार से अपने फैसलों को सबके सामने रखेगा, वहीं राष्ट्र में चल रहे मौजूदा मामलों को लेकर रणनीति बनाई गई है.

इस मुद्दे की उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई जिसमें न्यायालय ने बोला कि हम नोटिस जारी कर रहे हैं और क्षेत्रीय डीएम को आदेश देना चाहते हैं कि जहां शिवलिंग मिला है, उस स्थान को सुरक्षित रखा जाए. लेकिन, लोगों को नमाज से ना रोका जाए. दरअसल ज्ञानवापी में शिवलिंग मिलने का दावा किया गया है, लेकिन मुसलमान पक्ष का बोलना है कि यह फव्वारा है.

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