नैनीताल की खूबसूरत जगहों में से एक है टिफिन टॉप,जानें क्‍यों पड़ा टिफिन टॉप नाम

नैनीताल की खूबसूरत जगहों में से एक है टिफिन टॉप,जानें क्‍यों पड़ा टिफिन टॉप नाम

उत्तराखंड के नैनीताल की सुंदर वादियों में घूमने के लिए बहुत कुछ है यहां पहाड़ों की ऊंची चढ़ाई चढ़ने के बाद भिन्न-भिन्न सुंदर नजारे देखने को मिलते हैं ऐसी ही नैनीताल के अयारपाटा पहाड़ की एक ऊंची स्थान है टिफिन टॉप इसके नाम में ही इसकी विशेषता है लंबी सी चढ़ाई चढ़ने के बाद यहां से दिखाई देने वाला नजारा शाँति देने वाला है इसे डोरोथी सीट नाम से भी जाना जाता है

टिफिन टॉप नैनीताल शहर से करीब पांच किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है यहां पहुंचने के लिए बारापत्थर से होकर गुजरना होता है इस पहाड़ी तक पहुंचने के लिए घोड़े की सवारी की जा सकती है हालांकि यह रास्ता ट्रैकिंग करते हुए भी पार किया जा सकता है यह करीब 7520 फीट की ऊंचाई पर स्थित है

जानें क्‍यों पड़ा टिफिन टॉप नाम?
टिफिन टॉप की ओर जाते समय रास्ते में जंगलों के बीच में एक छोटा मैदान पड़ता है क्षेत्रीय निवासी बताते हैं कि यहां कभी विद्यालय के बच्चे आते थे और खेलने के बाद अपने टिफिन में रखा खाना खाते थे, जिस वजह से इस स्थान का नाम ‘टिफिन टॉप’ पड़ गया

डोरोथी सीट की भी है पहचान
बताया जाता है कि ब्रिटिशकाल में केलेट डोरोथी नाम की एक स्त्री इस स्थान पर बैठकर पेंटिंग किया करती थी हवाई हादसा में उसकी मृत्यु हो गई थी जिसके बाद केलेट के पति ने इस स्थान को डोरोथी सीट नाम दिया था

घोड़ा चालक सेवा समिति के अध्यक्ष मोहम्मद उमर ने बताया कि टिफिन टॉप की पहाड़ी ब्रिटिश काल से ही काफी प्रसिद्ध रही है काफी संख्या में नैनीताल आने वाले पर्यटक इस पहाड़ी से शहर का दीदार करना नहीं भूलते टिफिन टॉप के निकट ही डोरोथी सीट भी स्थित है उमर ने आगे बताया कि यहां आने वाले पर्यटक घोड़े की सवारी का मजा लेते हुए इस पहाड़ी की ओर जाते हैं घोड़े के एक चक्कर का किराया 760 रुपये है

टिफिन टॉप से राजभवन, नैनीताल का प्रसिद्ध सेंट जोसेफ विद्यालय और हिमालय पर्वत का सुंदर नजारा भी दिखाई देता है यहां के क्षेत्रीय निवासी अब्दुल ने बोला कि कहने को तो यह एक पर्यटन स्थल है लेकिन यहां शौचालय और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं इसके अतिरिक्त डोरोथी सीट के पास दरारें भी पड़ने लगी हैं, जिसका ठीक किया जाना बहुत महत्वपूर्ण है