स्वयंभू शिवलिंग के समक्ष सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा होती है पूरी

स्वयंभू शिवलिंग के समक्ष सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा होती है पूरी

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के पृथ्वीनाथ मंदिर (Prithvinath Temple Dehradun) की काफी मान्यता है यह मंदिर सहारनपुर चौक पर स्थित है मंदिर में सुबह-शाम आरती होती है हर रोज काफी संख्या में भक्त यहां आते हैं इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है गुरु द्रोणाचार्य (Guru Dronacharya) ने टपकेश्वर मंदिर के साथ-साथ यहां भी तपस्या की थी इस मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग भी है

देहरादून का प्राचीन नाम द्रोणनगरी था क्योंकि गुरु द्रोणाचार्य यहां काफी समय तक रहे थे पृथ्वीनाथ मंदिर के पुजारी भगवत पुरी ने बताया कि यह कई बरसों पुराना प्राचीन मंदिर है यहां दूर-दूर से लोग दर्शन करने आते हैं गुरु द्रोणाचार्य की तपस्या के रूप में देहरादून को एक विशेष पहचान मिली है मान्यता है कि देहरादून के टपकेश्वर मंदिर में गुरु द्रोणाचार्य ने तपस्या की थी, लेकिन इस मंदिर को भी उनकी साधना का केंद्र माना जाता है स्वयंभू शिवलिंग के समक्ष सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है

हर इच्छा होती है पूर्ण
मंदिर में दर्शन करने आईं निशा ने कहा, ‘जो शक्ति हमने यहां पाई है, वैसी कहीं नहीं मिली हमारे चारों धाम यहीं हैं भोलेनाथ हमें बुलाते रहे’ मंदिर के सेवादार नकुल गोयल ने बोला कि स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन को दूर-दूर से लोग आते हैं श्रद्धालुओं की सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूर्ण होती है

बताते चलें कि पृथ्वीनाथ मंदिर का उल्लेख महाभारत के केदारखंड भाग में है मंदिर परिसर में करीब 200 वर्ष पुराना एक बेल का पेड़ है, जिसमें सालभर फल आते हैं इसके अतिरिक्त एक पुराना पीपल का वृक्ष भी इस मंदिर की शोभा बढ़ाता है वर्ष 2002-03 में यहां खुदाई हुई थी, जिसमें एक विशाल हवन कुंड और एक चिमटा मिला था, जिसे लोग महाभारत काल से जुड़ा मानते हैं