साढ़े चार लाख श्रमिकों के लिए नई कल्याणकारी योजनाएं जल्द ही शुरू

साढ़े चार लाख श्रमिकों के लिए नई कल्याणकारी योजनाएं जल्द ही शुरू

उत्तराखंड में साढ़े चार लाख मजदूरों के लिए नयी कल्याणकारी योजनाएं जल्द ही प्रारम्भ होंगी. इसके लिए गवर्नमेंट उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड का दोबारा गठन करने जा रही है. यह बोर्ड सितंबर 2021 से पदेन अध्यक्ष के अधीन चल रहा है.

साइकिल आवंटन से लेकर अनेक योजनाओं में घोटालों के आरोपों के बीच कर्मकार बोर्ड पिछले तीन वर्ष से खूब चर्चाओं में रहा. पहले सीएम त्रिवेंद्र रावत ने बोर्ड को भंग करके हरक को हटाकर शमशेर सिंह सत्याल की अध्यक्षता में नया बोर्ड बनाया था. इसके बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने पिछले वर्ष इस बोर्ड को भंग करते हुए सत्याल को हटा दिया था.

तब से सचिव श्रम को पदेन अध्यक्ष बनाते हुए बोर्ड संचालित किया जा रहा है. बोर्ड में वर्तमान में पुरानी योजनाओं का फायदा तो मजदूरों को मिल रहा है लेकिन उनके कल्याण की कोई नयी योजना नहीं बन पा रही है. दोबारा बोर्ड बनने के बाद करीब साढ़े चार लाख मजदूरों को नयी सौगात मिलनी प्रारम्भ हो जाएगी.

दो बार भंग हो चुका है बोर्ड

प्रदेश में साल 2017 में श्रम मंत्री डाक्टर हरक सिंह रावत बोर्ड के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी देख रहे थे. तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देशों पर शासन ने अक्तूबर 2020 में हरक सिंह रावत को अध्यक्ष पद से हटाकर शमशेर सिंह सत्याल को जिम्मेदारी दे दी थी. सत्याल को त्रिवेंद्र का करीबी माना जाता था. हालांकि, तब हरक ने उन्हें हटाने का विरोध किया था. बाद में त्रिवेंद्र गवर्नमेंट ने बोर्ड का नए सिरे से गठन कर दिया. सत्याल की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने नवंबर में पिछले बोर्ड के निर्णय पलट दिए थे. इस बीच सीएम पद पर पुष्कर सिंह धामी के आने के बाद हरक सिंह रावत ने सत्याल के विरूद्ध मोर्चा खोल दिया था. जिसके बाद गवर्नमेंट ने 30 सितंबर 2021 को बोर्ड दोबारा भंग करते हुए सत्याल को हटा दिया था.

इन पुरानी योजनाओं का मिल रहा लाभ

पेंशन योजना, आवास सहायता योजना, हादसा सहायता योजना, स्वास्थ्य बीमा योजना, टूल किट योजना, विवाहोपरांत योजना, साइकिल सहायता योजना, सैनेट्री नैपकिन योजना, बारिश या धूप छाता योजना, छात्रवृत्ति योजना आदि.

कर्मकार बोर्ड भंग होने की वजह से मजदूरों के लिए नयी कल्याणकारी योजनाएं प्रारम्भ नहीं हो पा रही हैं. चूंकि, इन पर फैसला बोर्ड ही लेता है, इसलिए गवर्नमेंट दोबारा बोर्ड के गठन की तैयारी कर रही है. जल्द ही इसका गठन हो जाएगा.
– आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव, श्रम 

विस्तार

उत्तराखंड में साढ़े चार लाख मजदूरों के लिए नयी कल्याणकारी योजनाएं जल्द ही प्रारम्भ होंगी. इसके लिए गवर्नमेंट उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड का दोबारा गठन करने जा रही है. यह बोर्ड सितंबर 2021 से पदेन अध्यक्ष के अधीन चल रहा है.

साइकिल आवंटन से लेकर अनेक योजनाओं में घोटालों के आरोपों के बीच कर्मकार बोर्ड पिछले तीन वर्ष से खूब चर्चाओं में रहा. पहले सीएम त्रिवेंद्र रावत ने बोर्ड को भंग करके हरक को हटाकर शमशेर सिंह सत्याल की अध्यक्षता में नया बोर्ड बनाया था. इसके बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने पिछले वर्ष इस बोर्ड को भंग करते हुए सत्याल को हटा दिया था.

तब से सचिव श्रम को पदेन अध्यक्ष बनाते हुए बोर्ड संचालित किया जा रहा है. बोर्ड में वर्तमान में पुरानी योजनाओं का फायदा तो मजदूरों को मिल रहा है लेकिन उनके कल्याण की कोई नयी योजना नहीं बन पा रही है. दोबारा बोर्ड बनने के बाद करीब साढ़े चार लाख मजदूरों को नयी सौगात मिलनी प्रारम्भ हो जाएगी.

दो बार भंग हो चुका है बोर्ड

प्रदेश में साल 2017 में श्रम मंत्री डाक्टर हरक सिंह रावत बोर्ड के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी देख रहे थे. तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देशों पर शासन ने अक्तूबर 2020 में हरक सिंह रावत को अध्यक्ष पद से हटाकर शमशेर सिंह सत्याल को जिम्मेदारी दे दी थी. सत्याल को त्रिवेंद्र का करीबी माना जाता था. हालांकि, तब हरक ने उन्हें हटाने का विरोध किया था. बाद में त्रिवेंद्र गवर्नमेंट ने बोर्ड का नए सिरे से गठन कर दिया. सत्याल की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने नवंबर में पिछले बोर्ड के निर्णय पलट दिए थे. इस बीच सीएम पद पर पुष्कर सिंह धामी के आने के बाद हरक सिंह रावत ने सत्याल के विरूद्ध मोर्चा खोल दिया था. जिसके बाद गवर्नमेंट ने 30 सितंबर 2021 को बोर्ड दोबारा भंग करते हुए सत्याल को हटा दिया था.

इन पुरानी योजनाओं का मिल रहा लाभ

पेंशन योजना, आवास सहायता योजना, हादसा सहायता योजना, स्वास्थ्य बीमा योजना, टूल किट योजना, विवाहोपरांत योजना, साइकिल सहायता योजना, सैनेट्री नैपकिन योजना, बारिश या धूप छाता योजना, छात्रवृत्ति योजना आदि.

कर्मकार बोर्ड भंग होने की वजह से मजदूरों के लिए नयी कल्याणकारी योजनाएं प्रारम्भ नहीं हो पा रही हैं. चूंकि, इन पर फैसला बोर्ड ही लेता है, इसलिए गवर्नमेंट दोबारा बोर्ड के गठन की तैयारी कर रही है. जल्द ही इसका गठन हो जाएगा.