दुनिया का सबसे खतरनाक चिड़ियाघर, जहां पिंजरे में कैद होकर जाते हैं टूरिस्ट

दुनिया का सबसे खतरनाक चिड़ियाघर, जहां पिंजरे में कैद होकर जाते हैं टूरिस्ट

आपको ये जानकर भले ही अजीब लग रहा होगा या फिर आपको इस बात पर यकीन ना हो रहा होगा, लेकिन ये बात एकदम सच है। चीन का लेहे लेदु वाइल्ड लाइफ जू इसी तरह का चिड़ियाघर है। यहां खूंखार जानवर हमेशा खुलेआम घूमते हैं, उन्हें देखने के लिए लोग पिंजरों में कैद होकर आते हैं। यहां तक कि कई बार शेर और चीता जैसे खूंखार जानवर उनके इतने पास पहुंच जाते हैं लोगों की चीख निकल जाती है।

चीन का यह वाइल्ड लाइफ चिड़ियाघर चौंगक्विंग शहर में स्थित है। साल 2015 में इस चिड़ियाघर को खोला गया था। लेहे लेदु वाइल्डलाइफ जू नामक इस चिड़ियाघर में इंसानों को जानवरों के करीब जाने का बहुत ही अनोखा मौका मिलता है। सैलानी यहां के जानवरों को अपने हाथों से खाना भी खिला सकते हैं।


 यहां इंसानों को पिंजरों में भरकर जानवरों के आसपास लाया जाता है। इस दौरान शेर इंसानों को पिंजरे में देखकर ललचाते रहते हैं। वह उन्हें खाने के लालच में पिंजरे के पास आ जाते हैं। यहां तक कि वह पिंजरे के ऊपर भी चढ़ जाते हैं, लेकिन पिंजरा होने की वजह से वह किसी को अपना शिकार नहीं बना पाते।

वाइल्ड लाइफ जू के संरक्षकों के अनुसार, अपने दर्शको को हम सबसे अलग और रोमांचकारी अनुभव करवाते हैं। जू के प्रवक्ता चान लियांग ने कहा कि जब कोई जानवर आपका पीछा करता है अथवा जब वह हमला करता है, हम उस वक्त के अनुभव को अपने दर्शकों को महसूस करवाना चाहते हैं। चिड़ियाघर में घूमने आए लोगों की सुरक्षा को लेकर यहां सख्त निर्देश दिए जाते हैं।

इसके अलावा सुरक्षा को लेकर इस चिड़ियाघर में पुख्ता इंतेजाम किये गये हैं। 24 घंटे कैमरों से पिंजरों और जानवरों पर निगाह रखी जाती है। आपातकाल स्थिति में सिर्फ 5 से 10 मिनट में मदद पहुंचाई जाती है। जिससे किसी को कोई चोट ना पहुंचे।


ये डॉक्टर बना मानवता की मिशाल, किडनी ट्रांसप्लांट किया, मरीज को खून भी दिया

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भोपाल हमीदिया हॉस्पिटल को प्रदेश में पहला किडनी ट्रांसप्लांट करने का खिताब मिल चुका है. इस ट्रांसप्लांट यूनिट को प्रारम्भ कराने के लिए डाक्टर हिमांशु शर्मा बीते पांच वर्षों से कोशिश कर रहे थे.
जब पहले ट्रांसप्लांट की घड़ी आई तो मरीज का हीमोग्लोबिन कम निकला. ट्रांसप्लांट के लिए करीब 6 यूनिट ब्लड की आवश्यकता थी. मरीज के बेटे राजीव शर्मा ने कोशिश किया लेकिन ओ पॉजीटिव ग्रुप का ब्लड नहीं मिल पा रहा था जब इसकी जानकारी डाक्टर हिमांशु शर्मा को लगी तो उन्होंने स्वयं ब्लड दिया. बुधवार को हमीदिया में मुरैना से पहुंचे मरीज केशव दत्त शर्मा के संबंधियों ने डाक्टर शर्मा के सरेंडर की सराहना की.


अब मिली सफलता
डाक्टर हिमांशु शर्मा ने 2017 में एमडी करने के बाद हमीदिया हॉस्पिटल में ज्वाइनिंग दी थी. तभी से वे यहां किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट प्रारम्भ करने के कोशिश में जुट गए. डेढ़ वर्ष पहले आई कोविड-19 महामारी ने उनके कोशिश को रोक दिया लेकिन जैसे ही मरीज कम हुए उन्होंने फिर अपनी मुहिम प्रारम्भ की और 7 सितंबर को मुरैना के पोरसा निवासी केशव दत्त शर्मा को उनकी पत्नी की किडनी प्रत्यारोपित कर प्रदेश में पहले सरकारी ट्रांसप्लांट करने वाले हॉस्पिटल में शामिल किया.

तीन दिन में डिस्चार्ज
केशव दत्त शर्मा के बेटे राजीव ने बताया कि दो-तीन दिन में हॉस्पिटल से माता-पिता को डिस्चार्ज किया जाएगा. इस मौके पर पूरा परिवार हॉस्पिटल पहुंचकर डाक्टर हिमांशु और पूरी टीम को धन्यवाद देंगे.