श्रीलंका में पावर प्रोजेक्ट का काम देने को लेकर बवाल मचा

श्रीलंका में पावर प्रोजेक्ट का काम देने को लेकर बवाल मचा

अडानी ग्रुप को श्रीलंका में पावर प्रोजेक्ट का काम देने को लेकर हंगामा मचा हुआ है. श्रीलंका में सरकारी सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के अध्यक्ष एमएमसी फर्डिनेंडो के एक बयान से यह पूरा हंगामा खड़ा हुआ है. जिसमें उन्होंने बोला है कि श्रीलंका में अडानी समूह को विंड पावर प्रोजेक्ट देने के लिए पीएम मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे पर दबाव डाला था.

बता दें कि इस बयान के बाद अब एमएमसी फर्डिनेंडो ने अपना इस्तीफा दे दिया है. वहीं प्रोजेक्ट का काम देने को लेकर गुरुवार को सीईबी ने साफ किया कि यह “भारत गवर्नमेंट के निवेदन और सिफारिश पर किया गया था.

सीईबी द्वारा डेली एफटी अखबार में जारी किया गये स्पष्टीकरण में बोला गया है कि हिंदुस्तान गवर्नमेंट के निवेदन और सिफारिश पर अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) के एक प्रस्ताव पर श्रीलंका गवर्नमेंट द्वारा अमल किया गया. जिसमें अडानी ग्रुप को निवेश बोर्ड (बीओआई) के लिए गवर्नमेंट की नीति स्वीकृति दे दी है.

श्रीलंका के मन्नार और पूनरिन में एजीईएल को पावर प्रोजेक्ट आवंटित करने को लेकर इस महीने की आरंभ में तत्कालीन सीईबी अध्यक्ष, एमएमसी फर्डिनेंडो ने संसद की समिति (सीओपीई) को बताया था कि “मन्नार में पवन ऊर्जा संयंत्र का प्रोजेक्ट हिंदुस्तान के अडानी समूह को दिया गया था, क्योंकि भारतीय पीएम मोदी ने राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे पर इसके लिए दबाव डाला था.

बता दें कि फर्डिनेंडो के इस बयान के बाद गोटाबाया राजपक्षे ने एक ट्वीट के जरिए इस बयान का खंडन किया था. जिसके बाद फर्डिनेंडो ने भी अपने बयान को लेकर बिना शर्त माफी मांगी थी. हालांकि इसके कुछ दिनों बाद उन्होंने अपना पद छोड़ दिया है. CEB चेयरमैन एमसीसी फर्डिनेंडो ने अपनी माफी में बोला था कि संसदीय पैनल के सामने वह दबाव और भावनाओं के चलते भावुक हो गए थे. जिस कारण उन्होंने भारतीय पीएम शब्द का प्रयोग किया.

बता दें कि इस मुद्दे में हिंदुस्तान में कांग्रेस पार्टी ने भी मोदी गवर्नमेंट पर धावा बोला है. कुछ दिन पहले कांग्रेस पार्टी प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने आरोप लगाते हुए बोला था कि श्रीलंका की सरकारी सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के अध्यक्ष एमएमसी फर्डिनेंडो ने वहां की संसद में बोला कि हमारे राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे पर मोदी जी ने दबाव डाला कि अडानी समूह को पवन ऊर्जा परियोजना का काम दिया जाए.

वल्लभ ने प्रश्न किया था कि क्या प्राइवेट पार्टी को ठेका दिलाने के लिए हमारे राष्ट्र के पीएम बने है. हिंदुस्तान जैसे महान राष्ट्र के पीएम किसी कंपनी के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं क्या? उन्होंने बोला कि प्रवर्तन निदेशालय और बाकी एजेंसियों ने इस मुद्दे में क्या जांच करना ठीक नहीं समझा? कांग्रेसी प्रवक्ता ने बोला कि पीएम एक निजी आदमी को लाभ क्यों पहुंचाना चाहते थे? आखिर उनकी क्या विवशता थी?