फ्रांस से तीन और राफेल विमान बिना रुके पहुंचे भारत

फ्रांस से तीन और राफेल विमान बिना रुके पहुंचे भारत

लड़ाकू विमान का राफेल (Rafel Jet) का एक और खेप फ्रांस (France) से भारत आया है। फांस से तीन और राफेल लड़ाकू विमान बुधवार को भारत पहुंच गए है। भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) से मिली जानकारी के अनुसार ये विमान फ्रांस के उतरे हवाई अड्डे से उड़े और बिना कहीं रुके सीधे भारत पहुंच गए। फ्रांस में भारतीय दूतावास ने ट्विट कर बताया कि रास्ते में संयुक्त अरब अमीरात के विमान ने इन लड़ाकू विमानों में आसमान में ही ईंधन भरा। इससे पहले पांच राफेल विमानों का पहला जत्था 29 जुलाई 2020 को भारत पहुंचा था।

भारत-फ्रांस के बीच 36 एयरक्राफ्ट खरीदने की डील
हाल ही में संसद में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक रिपोर्ट के अनुसार राफेल जेट की खरीद को लेकर रक्षा मंत्रालय ने अपनी खरीद नीति में बदलाव किया था। ये बदलाव 2016 में किया गया था। इस बदलाव के बाद 2016 में भारत और फ्रांस के बीच 36 एयरक्राफ्ट खरीदने की डील हुई थी। इस डील और नीति में बदलाव के कारण  ऑफसैट पार्टनर घोषित करने की अनिवार्यता खत्म हो चुकी थी। संसद में पेश हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि रक्षा खरीद नीति में ये बदलाव साल 2015 में किया गया था लेकिन इसे अप्रैल 2016 से यह लागू किया गया था। 

सदन में पेश हुई कैग रिपोर्ट
रक्षा खरीद नीति में हुए इस बदलाव के अनुसार विदेशी वेंडर को कॉन्ट्रैक्ट साइन करते समय अपने ऑफसैट पार्टनर के बारे में बताना जरूरी नहीं है। लेकिन सदन में पेश हुई कैग रिपोर्ट में बताया गया है कि ऑफसैट दायित्वों को सितंबर 2019 से लागू होना था और राफेल डील की पहली वार्षिक प्रतिबद्धता इस महीने पूरी हो जानी चाहिए थी और इसका रक्षा मंत्रालय के पास विवरण होना चाहिए। 

खराब प्रबंध व्यवस्था को लेकर नाराजगी
सरकार ने ऑफसेट को खत्म करने का फैसला तब लिया है जब कुछ समय पहले ही कैग ने ऑफसेट नीति के खराब प्रबंध व्यवस्था को लेकर नाराजगी प्रकट की थी। यहां ये भी बता दें कि खत्म की गई ऑफसेट नीति के तहत विदेशी रक्षा उत्पादन इकाइयों को 300 करोड़ रुपये से अधिक के सभी कॉन्ट्रेक्ट के लिए भारत में कुल कॉन्ट्रेक्ट प्राइस का कम से कम 30% खर्च करना होता है। जिसे कलपुर्जों की खरीद, प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण या अनुसंधान और विकास इकाइयों की स्थापना करके करना होता है।

इस बारे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि डीएपी में भारत के घरेलू उद्योग के हितों की रक्षा करने तथा आयात प्रतिस्थापन तथा निर्यात के लिए विनिर्माण केंद्र स्थापित करने के लिहाज से विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) को बढ़ावा देने के प्रावधान भी शामिल हैं।


डॉक्‍टर एंथनी फाउची ने कहा कि कोविड-19 महात्रासदी से जूझ रहा भारत, व्‍यापक टीकाकरण एकमात्र हल

डॉक्‍टर एंथनी फाउची ने कहा कि कोविड-19 महात्रासदी से जूझ रहा भारत, व्‍यापक टीकाकरण एकमात्र हल

अमेरिका के सबसे बड़े संक्रामक रोग जानकार डॉक्‍टर एंथनी फाउची ने बोला है कि हिंदुस्तान कोविड-19 वायरस महामारी के कहर से जूझ रहा है और दुनिया के अन्‍य राष्ट्रों को सहायता के लिए आगे आना चाहिए. फाउची ने बोला कि हिंदुस्तान अस्‍पताल के बिस्‍तरों, ऑक्‍सीजन की कमी, पीपीई किट और अन्‍य चिकित्‍सा उपकरणों की कमी से जूझ रहा है और अमेरिका जैसे राष्ट्रों की इसमें सहायता करनी चाहिए. उन्‍होंने बोला कि इस महासंकट से उबरने के लिए एकमात्र दीर्घकालिक तरीका बड़े पैमाने पर लोगों का टीकाकरण है.

डॉक्‍टर फाउची का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब शनिवार को आधिकारिक आंकड़े के अनुसार इस महामारी से 4 हजार लोगों की मृत्यु हो गई. उन्होंने इस खतरनाक महामारी से निपटने के लिए घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोविड-रोधी टीके के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रमुख चिकित्सा सलाहकार फाउची ने एबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, 'इस महामारी का पूरी तरह से खात्मा करने के लिए लोगों का टीकाकरण किया जाना चाहिए.'


'टीका निर्माण के लिए हिंदुस्तान को सहायता देनी चाहिए'
फाउची ने बोला कि हिंदुस्तान दुनिया का सबसे बड़ा टीका निर्माता देश है. उन्हें अपने संसाधन मिल रहे हैं, न केवल भीतर से, बल्कि बाहर से भी. उन्होंने कहा, 'यही कारण है कि अन्य राष्ट्रों को या तो हिंदुस्तान को उनके यहां टीका निर्माण के लिए सहायता देनी चाहिए अथवा टीके दान देने चाहिए.' डाक्टर फाउची ने एक प्रश्न के उत्तर में बोला कि हिंदुस्तान को तत्काल अस्थायी हॉस्पिटल बनाने की आवश्यकता है, जिस तरह करीब एक वर्ष पहले चाइना ने किया था.

उन्होंने कहा, 'आपको ऐसा करना ही होगा. आप हॉस्पिटल में बिस्‍तर नहीं होने पर लोगों को गलियों में नहीं छोड़ सकते. ऑक्सीजन के दशा बहुत गम्भीर हैं. मेरा मतलब है कि लोगों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाना वास्तव में दुखद है.' फाउची ने बोला कि तात्कालिक तौर पर हॉस्पिटल के बिस्तरों, ऑक्सीजन, पीपीई किट और अन्य चिकित्सा आपूर्ति की समस्या है. उन्होंने वायरस के प्रसार की रोकथाम के लिए देशव्यापी लॉकडाउन की आवश्यकता पर भी जोर दिया.


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