दुनियाभर में कोरोना वायरस के मामलों में कमी आई, दो महीने में सबसे बड़ी गिरावट

दुनियाभर में कोरोना वायरस के मामलों में कमी आई, दो महीने में सबसे बड़ी गिरावट

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि पिछले सप्ताह दुनिया भर में कोरोना वायरस के करीब 40 लाख मामले दर्ज किए गए जो नए मामलों को देखते हुए दो महीने से अधिक समय में पहली बड़ी गिरावट है। डब्ल्यूएचओ ने मंगलवार को जारी अपने साप्ताहिक आंकड़ों में बताया कि पिछले सप्ताह की तुलना में दुनिया के सभी क्षेत्रों में मामलों में कमी देखी गई है। हाल के सप्ताह में कोविड-19 के 44 लाख मामले दर्ज किए गए हैं।

वहीं, दुनिया भर में मौतों की संख्या में भी कमी आई है और यह लगभग 62,000 दर्ज की गई। सबसे ज्यादा कमी दक्षिण पूर्वी एशिया में आई है जबकि मौतों में अफ्रीका में सात प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा नए मामले अमेरिका, ब्रिटेन, भारत, ईरान और तुर्की में आए तथा वायरस का बेहद संक्रामक स्वरूप 'डेल्टा' अब 180 देशों में पहुंच गया है। डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा कि वयस्कों की तुलना में कोविड-19 से बच्चे एवं किशोर कम प्रभावित हैं। उसने कहा कि 24 साल से कम उम्र के लोगों की वायरस के कारण मृत्यु का प्रतिशत करीब 0.5 प्रतिशत है।


फ्रांस में स्वास्थ्यकर्मियों का टीकाकरण अनिवार्य

फ्रांस ने स्वास्थ्यकर्मियों का टीकाकरण अनिवार्य कर दिया है। अगर वे टीका नहीं लगवाते हैं तो बुधवार से काम पर नहीं जा सकेंगे। देश में करीब तीन लाख स्वास्थ्यकर्मियों का टीकाकरण नहीं हुआ है जिससे अस्पतालों को भय है कि उनके यहां कर्मियों की कमी हो सकती है।

कंबोडिया में कल से बच्चों को लगेंगे टीके

कंबोडिया शुक्रवार से छह से 11 साल की उम्र के बच्चों का कोविड रोधी टीकाकरण शुरू करेगा। प्रधानमंत्री हुन सेन ने बुधवार को कहा कि यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि बच्चे सुरक्षित तरीके से स्कूल जाना शुरू कर सकें जो कोरोना वायरस महामारी की वजह से लंबे समय से बंद हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह तीन से पांच वर्ष के बच्चों का भी जल्द टीकाकरण कराने पर विचार कर रहे हैं।


कोयले के इस्तेमाल करने पर जी 20 देशों में मतभेद, पर्यावरण पर होने वाली रोम की बैठक पर संकट के बादल

कोयले के इस्तेमाल करने पर जी 20 देशों में मतभेद, पर्यावरण पर होने वाली रोम की बैठक पर संकट के बादल

बिजली के उत्पादन में कोयले का इस्तेमाल बंद करने के मुद्दे पर दुनिया के 20 सबसे संपन्न देशों में मतभेद पैदा हो गए हैं। धरती का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लिए बड़े पैमाने पर कोयले का इस्तेमाल जरूरी माना गया है। इससे इटली की राजधानी रोम में 30-31 अक्टूबर को होने वाली जी 20 देशों के नेताओं की बैठक में पर्यावरण सुधार के मसले पर आमराय बनने की संभावना क्षीण हो गई है। यह बैठक स्काटलैंड के ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले इसी साल पर्यावरण पर होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारी बैठक के रूप में देखी जा रही है।

इसी साल जुलाई में नेपल्स में हुए दुनिया के ऊर्जा और पर्यावरण मंत्रियों के सम्मेलन में कोयले का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे चीन और भारत ने पर्यावरण सुधार के लिए जिन कदमों का आश्वासन दिया था, वह उन्होंने पूरा नहीं किया है। यह बात नाम स्पष्ट न किए जाने की शर्त पर तीन सूत्रों ने कही है। विशेषज्ञों के अनुसार दोनों विकासशील देश कोविड-19 महामारी से पैदा हुई मंदी से निपटने के लिए अपने ऊर्जा उत्पादन में कमी नहीं करना चाहते हैं। यही वजह कोयला इस्तेमाल में कमी नहीं होने दे रही। दोनों देशों का मानना है कि अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य विकसित देश 20 वीं सदी में कोयले का इस्तेमाल कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हुए लाभ अर्जित कर चुके हैं। अब जबकि भारत और चीन अपनी जरूरत के लिए कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं तब उनकी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए कहा जा रहा है। भारत पश्चिमी देशों से पर्यावरण सुधार के लिए प्रदूषण मुक्त नई तकनीक के साथ ही कोयले का इस्तेमाल कम करने के बदले आर्थिक सहायता चाहता है। पेरिस समझौते में विकासशील देशों के लिए ये प्रविधान हैं। लेकिन सहायता में व्यवधान पड़ने के कारण कोयले का इस्तेमाल तेज गति से कम नहीं हो पा रहा है।


संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले हुए पेरिस समझौते में धरती का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से कम करने पर सहमति बनी थी। इस समझौते की ग्लासगो में समीक्षा होनी है और भविष्य के लिए रूपरेखा तय होनी है। लेकिन कोविड महामारी के चलते बने हालात ने इस प्रक्रिया के बाधित होने की आशंका पैदा कर दी है।