उत्तर कोरिया: कारागार से भागने वालों को सरेआम दी जाती है फांसी

उत्तर कोरिया: कारागार से भागने वालों को सरेआम दी जाती है फांसी

नई दिल्ली/सियोल: उत्तर कोरिया में मानवाधिकार हनन को लेकर हमेशा से सवाल खड़े होते रहे हैं, लेकिन इस बार संयुक्त देश की एक रिपोर्ट ने उत्तर कोरिया की पोल खोल कर रख दी है.

संयुक्त देश महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने बोला है कि उत्तर कोरिया में मानवाधिकारों को हनन किया जा रहा है व इसकी भयावह फोटोज़ सामने आई है. उन्होंने बोला कि जो रिपोर्ट सामने आई है उससे लोगों के साथ हो रहे क्रूर व्यवहार का अंदाजा लगाया जा सकता है.

उन्होंने बोला कि उत्तर कोरिया में कारागार से भागने की प्रयास करने वाले कैदियों को सरेआम फांसी दी जा रही है, तो वहीं हिरासत में लिए गए लोगों के साथ यौन हिंसा की जाती है. इतना ही नहीं कैदियों को धातु से बनी छड़ों और डंडों से बुरी तरह पीटा जाता है.

संयुक्त देश महासभा में पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया है कि कैदियों के कपड़े उतारकर उसकी तलाशी ली जाती है. कई महीनों तक पूछताछ की जाती है व फिर हिरासत में सालों तक रखा जाता है.एक-एक कमरे में दर्जनों लोगों को भर दिया जाता है, जिसमें वे लेट भी नहीं सकते हैं.

एंटोनियो गुटेरेस ने बोला कि संयुक्त देश मानवाधिकार ऑफिस ने उन सभी उत्तर कोरियाई नागरिकों की आपबीती का विश्लेषण किया है जिन्हें हिरासत में रखा गया.

गुटेरेस ने बताया कि पूर्व कैदियों ने सुरक्षा अधिकारियों पर 'जीवन, आजादी व आदमी की सुरक्षा के अधिकारों का घोर उल्लंघ' किए जाने का आरोप लगाया.

उत्तर कोरिया का सभी आरोपों से इनकार

रिपोर्ट में बताया गया है कि कारागार में बंद ज्यादातर महिलाएं थी, जिनके साथ क्रूर व्यवहार किया जाता रहा है. इनमें से वे अधिकांश महिलाएं हैं,जो बंटवारे के दौरान आरंभ में चाइना चली गई थीं.

संयुक्त देश ने ऐसे 330 से अधिक स्त्रियों का इंटरव्यू किया है जो देश छोड़ चुके हैं व उनकी आपबीती जानने की प्रयास की है.

बता दें कि उत्तर कोरिया हमेशा से इन आरोपों को खारिज करता रहा है. जेनेवा में उत्तर कोरिया के राजदूत हान त्ये सोंग ने बोला था कि सरकार ने लोगों के हित के लिए हर संभव कोशिश किए हैं वमानवाधिकारों का किसी भी प्रकार से उल्लंघन नहीं हुआ है. हालांकि उत्तर कोरिया मानवाधिकार अधिकारियों को वीजा देने से मना करता रहा है.