फूट-फूट कर रोये धोनी, खेल जगत शोक में डूबा

फूट-फूट कर रोये धोनी, खेल जगत शोक में डूबा

नई दिल्ली: रांची क्रिकेट के भीष्म पितामह और भारतीय पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी के क्रिकेट गुरू देवल सहाय का आज यानी मंगलवार को मृत्यु हो गई। उन्होंने रांची के अस्तपाल में अपनी अंतिम सांस ली। उनकी उम्र 73 वर्ष थी। बता दें कि देवल सहाय ने राष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय पर कई महान क्रिकेटरों को खेल के मैदान में उतारा है। उन्हीं क्रिकेटरों में से एक महेन्द्र सिंह धोनी भी थे।

सहाय ने इन संगठनों में दिया है अपना योगदान
पूर्व भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह के क्रिकेट गुरू देवल दा सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड में बतौर निदेशक के पद पर काम किया था। इसके अलावा मेकॉन और सीएमपीडीआई में भी मुख्य पद पर रह कर काम किया है। उनके मृत्यु के बाद खेल जगत के कई संगठनों में शोक में डूबा हुआ है।

सहाय ने इन क्रिकेटरों को किया है तैयार
रांची क्रिकेट के भीष्म पितामह देवल सहाय ने कई शानदार क्रिकेटर तैयार किया था। इन शानदार क्रिकेटरों में से महेंद्र सिंह धोनी एक थे। एसएस धोनी के अलावा उन्होंने आदिल हुसैम, मुस्तफा, अनवर, धनंजय सिंह जैसे शानदार खिलाड़ियों को क्रिकेट के मैदान तक पहुंचाया। देवल सहाय ने अपने कई शिष्यों को राज्यस्तरीय क्रिकेट के मैदान तक उतार चुके हैं।

एमएस धोनी फिल्म में सहाय की मिली झलकियां
पूर्व भारतीय कप्तान महेन्द्र सिंह के मेंटर देवल सहाय थे। धोनी की बायोपिक फिल्म ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ में देवल सहाय की झलकियां देखने को मिली है। इस फिल्म को देखकर आप यह अंदाजा लगा सकते है कि देवल सहाय ने एसएम धोनी को एक सफल कप्तान बनाने के लिए किस तरह से सहायता की थी।

क्रिकेट जगत का भीष्म पितामह है सहाय
देवल सहाय एक शख्स थे, जिसे रांची के क्रिकेट जगत का भीष्म पितामह कहा जाता है। उन्होंने ऐसे क्रिकेटरों को तैयार किया, जो राज्य स्तर पर खेल के मैदन में प्रतिनिधित्व किया है, साथ ही  देश का भी  प्रतिनिधित्व किया।


आखिरकार तपकर सोना बन ही गए रिषभ पंत, बहुत झेलनी पड़ी थी आलोचना

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सिडनी टेस्ट के पांचवें दिन से एक दिन पहले की बात है, रिषभ पंत की कोहनी में चोट थी और परिस्थिति कुछ ऐसी थी कि उन्हें मैच के पांचवें दिन मैदान पर उतरना था। तब पंत थ्रोडाउन स्पेशलिस्ट के साथ घंटों तक अभ्यास कर रहे थे। थ्रोडाउन कर रहे नुवान पूरी गति से बाउंसर नहीं फेंक रहे थे। पंत ने कहा पूरी गति से डालो, मैदान पर ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज ऐसी धीमी गेंद नहीं फेंकेंगे। नुवान को लग रहा था कि कहीं पंत को चोट नहीं लग जाए, लेकिन पंत लगातार कहते दिखे, और तेज डालो, और तेज डालो। पंत उस मैच में 97 रन बनाकर आउट हुए थे और उस टेस्ट को जिताने से कुछ दूर रह गए थे, लेकिन मंगलवार को वह पहली बार कोई टेस्ट मैच जिताकर नाबाद लौटे। इस आठ दिन के अंदर नादान रिषभ, नायाब पंत बन गया।

सिडनी में 97 रन पर आउट होने के बाद जब पंत ने अपने कोच तारक सिन्हा को फोन किया, तो वह काफी निराश थे। सिन्हा ने कहा कि कभी-कभी तुम्हें खराब गेंदों को छोड़ना भी होगा। पंत का जवाब था मैं खराब गेंदों को छोड़ नहीं सकता। दरअसल, अपने करियर के शुरुआती दिनों से पंत ऐसे ही हैं। उनके अंदर युवराज सिंह जैसे छक्के लगाने की क्षमता के साथ फौलादी इरादे भी हैं। अपने तेज तर्रार शॉट की वजह से ही वह राहुल द्रविड़ के पसंदीदा बने थे और इन्हीं शॉट चयन की वजह से पंत का करियर डूबता जा रहा था। वर्ष 2020 आते-आते वह अपने पसंदीदा प्रारूप (टी-20) से बाहर हो गए थे। वनडे टीम से भी निकाले गए और टेस्ट टीम में भी पहली पसंद नहीं रहे।


पंत की मदद इस मामले में कोई दूसरा नहीं कर सकता था। पंत की लड़ाई खुद से थी। यह लड़ाई इतनी आसान भी नहीं रही, क्योंकि वीरेंद्र सहवाग भी अपने शॉट चयन की वजह से विकेट खो बैठते थे और आलोचना झेलते थे, लेकिन पंत के साथ यह बार-बार होने लगा। कई बड़े मौकों पर होने लगा। पंत भी आम से खास बनने का सपना देखते आए, लेकिन उनके सपने भी बड़े थे। वह एमएस धौनी की तरह विजयी बाउंड्री लगाकर बड़ा मैच जिताना चाहते थे। ऑस्ट्रेलिया में अभ्यास मैच में बड़ी पारी खेलने के बावजूद पहले टेस्ट में पहली पसंद रिद्धिमान साहा बने।


दिल्ली की सर्दियों में गुरुद्वारे में रात बिताकर टेस्ट कैप हासिल करने वाले पंत अंदर से टूटने वालों में से कहां थे। सिडनी टेस्ट और गाबा टेस्ट में पंत के शॉट लगाने के तरीकों में पहले से कुछ भी अलग नहीं था, अलग था तो उनके अंदर का संकल्प।

2016 में उनके साथ अंडर-19 विश्व कप खेलने वाले तेज गेंदबाज शुभम मावी ने बताया कि वह क्लीन हिटर रहे हैं। कभी भी कितना भी दबाव हो वह अपना ही खेल खेलता था। घरेलू स्तर पर वह तीन बार फेल हुआ तो अगले मैच में उसकी बड़ी पारी सब भुला देती थी। राहुल द्रविड़ सर को भी उसकी यही खासियत पसंद थी लेकिन भारतीय टीम के साथ खेलते हुए उसकी समस्या यही थी कि उसके प्राकृतिक खेल की ही आलोचना होने लगी, जिसे वह बदल नहीं सकता, लेकिन मंगलवार को उसने अपनी इसी काबिलियत से अपने अंदर के पंत को हरा दिया।

रिषभ पंत के कोच तारक सिन्हा ने कहा है, "पंत ने अब अपने सभी आलोचकों को शांत कर दिया। टीम ने उसे मौका देकर दिखाया कि वह उस पर पूरा विश्वास करती है। मुझे पूरा विश्वास है कि उसकी विकेटकीपिंग भी बेहतर होगी। जब आप अपनी जगह को लेकर संतुष्ट हो जाओ और सभी कहें कि आप अच्छे हो तो बाकी चीजें खुद ठीक होने लगती हैं।"


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