खुलेआम घूम रहे गबन के फरार आरोपितों पर औरंगाबाद पुलिस मेहरबन

खुलेआम घूम रहे गबन के फरार आरोपितों पर औरंगाबाद पुलिस मेहरबन

आपरेटिव बैंक की सरकारी राशि गबन के फरार आरोपितों पर पुलिस की मेहरबान है। तभी तो गबन के आरोपित देव कोआपरेटिव बैंक के रोकड़पाल उपेंद्र कुमार, प्रभारी प्रबंधक गुप्तेश्वर प्रसाद एवं मदनपुर बैंक के कर्मी अभिषेक कुमार अब तक गिरफ्तार नहीं किए गए हैं। उपेंद्र के खिलाफ देव थाना में कांड संख्या 56/ 21, अभिषेक के खिलाफ वर्ष 2019 में नगर थाना कांड संख्या 320/ 19 एवं गुप्तेश्वर के खिलाफ देव थाना कांड संख्या 133/ 20 दर्ज है। गिरफ्तारी के प्रति कांड के आइओ सुस्त बैठे हैं और आरोपित खुलेआम घूम रहे हैं। पुलिस फरारी का बहाना बनाकर आरोपितों को लाभ पहुंचा रही है। पुलिस के इस लाभ से आरोपितों को कोर्ट से जमानत का लाभ मिल सकता है।

जमानत के बाद पुलिस गिरफ्तारी नहीं कर सकती है। चर्चा है कि फरार आरोपित जमानत के लिए दौड़ लगा रहे हैं। हद तो यह कि वर्ष 2019 एवं 2020 में दर्ज कांड के आरोपित को भी पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी है। सरकारी राशि गबन के आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए जिला कोआपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक अमर कुमार झा  ने 18 अगस्त 2021 को एसपी को एक पत्र भेजा है। एसपी के द्वारा प्रबंध निदेशक के संबंधित पत्र के माध्यम से कार्रवाई करने का आदेश सदर एसडीपीओ को 28 अगस्त 2021 को भेजा है। एसपी का निर्देश संबंधित थानाध्यक्षों को भेजा गया होगा पर आजतक गिरफ्तारी की कार्रवाई नहीं हुई है।

गबन के आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने से वर्दी की बदनामी हो रही है। थानाध्यक्ष से लेकर कांड के आइओ पर सवाल उठ रहा है। प्रबंध निदेशक ने बताया कि सरकारी राशि गबन करने के आरोप में बैंक कर्मी उपेंद्र कुमार, अभिषेक कुमार एवं गुप्तेश्वर प्रसाद पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। तीनों बैंक कर्मियों ने बैंक की सरकारी राशि का गबन किया है। गिरफ्तारी के लिए मेरे पत्र पर एसपी के द्वारा 28 अगस्त को सदर एसडीपीओ को निर्देश पत्र भी भेजा गया है पर अबतक गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। गिरफ्तारी नहीं होने पर फरार बैंक कर्मियों को जमानत का लाभ मिल सकता है। उधर एसपी ने बताया कि तीनों मामले में गिरफ्तारी अबतक क्यों नहीं हुई है इसे देखते हैं।


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तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) प्रशासन लालबाग आवासीय परिसर की सुरक्षा को लेकर उदासीन बना हुआ है। नौ अक्टूबर की रात पीजी इतिहास विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. राधिक मिश्रा से लूट के बाद भी लालबाग की सुरक्षा ताक पर है। 13 दिन बीत जाने के बाद भी सुरक्षा को लेकर कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया है। इस कारण दोबारा किसी बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता है। परिसर के सुरक्षा फाइलों में हो रही है।


प्रवेश द्वार पर बेरोकटोक आवाजाही

घटना के इतने दिन बाद कई बार अधिकारियों ने परिसर का निरीक्षण किया। मुख्य द्वार पर 24 घंटे अलग-अलग शिफ्ट में गार्ड के तैनाती की बात हुई। दो दिनों तक गार्ड की मौजूदगी रही, लेकिन स्थिति फिर जस की तस हो गई है। मुख्य द्वार लोगों का बेरोकटोक आना जाना लगा हुआ है।

क्वार्टर का ग्रिल और गेट तक बदमाशों ने बेच डाला

लालबाग के क्वार्टर नंबर 19 की बुरी हालत है। एक शिक्षक के क्वार्टर खाली करने के बाद बदमाशों ने आवास का ग्रिल से लेकर दरवाजा तो चोरी कर बेच दिया, किंतु लालबाग की सुरक्षा में तैनात गार्डों को इसकी भनक तक नहीं लगी। इसकी कई बार मौखिक सूचना प्राक्टर डा. रतन मंडल को भी दी गई, किंतु इस पर कोई सुध नहीं ली।


जर्जर क्वार्टर में बदमाशों की होती है अड्डेबाजी

परिसर में रहने वाले शिक्षकों ने बताया कि खाली क्वार्टर में स्थानीय कुछ असामाजिक तत्व जुआ खेलते हुए नशा करते हैं। उन्हें रोकने टोकने वाला कोई नहीं है। जब शिक्षक गार्ड को बदमाशों को खदेडऩे की बात कहते हैं तो वे भी भय के कारण बदमाशों से उलझना नहीं चाहते हैं। विवि प्रशासन भी ऐसे मामलों में रूचि नहीं लेती है।

अवैध तरीके से रखे जाते हैं लोग

असिस्टेंट प्रोफेसर के साथ लूट की घटना के बाद पुलिस को जानकारी मिली कि एक संदिग्ध नौकरानी को एक शिक्षिका ने अवैध तरीके से क्वार्टर में जगह दी है। उस शिक्षका को कुलसचिव ने ऐसा करने के लिए चेतावनी भी दी थी। हालांकि शिक्षिका ने कहा था कि कई बार उसे खाली करने को कहा था, ङ्क्षकतु वह खाली नहीं कर रही है।

एक दर्जन से ज्यादा चोर रास्ते


परिसर में प्रवेश के लिए एक दर्जन से ज्यादा चोर रास्ते बने हुए हैं। जगह-जगह चाहरदीवारी टूटी हुई है। इसकी मरम्मती के लिए कई बार योजनाएं बनी, लेकिन फाइलों में ही निर्देश और योजनाएं बनती रही, ङ्क्षकतु स्थिति जस की तस बनी हुई है।

दिन भर मनचलों का लगा रहता आना-जाना

परिसर में दिन भर मनचलों का आना-जाना लगा रहता है। वे लहरियाकट स्टाइल में बाइक लेकर मुख्य द्वार से अंदर प्रवेश करते हैं और गल्र्स हास्टल के मुख्य रास्ते से बाइक लेकर वापस बाहर निकल जाते हैं। इस बीच कई बार छात्राएं छेडख़ानी की भी शिकार हुई हैं। इसकी शिकायत विवि प्रशासन को भी हुई है, ङ्क्षकतु उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।


टीएमबीयू की हर स्थिति पर नजर है। जो लोग जवाबदेही से भाग रहे हैं, उन्हें कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आवासीय परिसर और वहां रहने वाले शिक्षकों और छात्राओं की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं होगा। अगले हफ्ते आने के बाद पूरे मामले की समीक्षा के बाद कड़े निर्णय लिए जाएंगे।