KBC 13: जीएसटी भरने के नाम पर अमिताभ बच्चन की हुई बोलती बंद

KBC 13: जीएसटी भरने के नाम पर अमिताभ बच्चन की हुई बोलती बंद

अमिताभ बच्चन अपने क्विज रियलिटी शो केबीसी 13 (कौन बनेगा करोड़पति 13) को लेकर आए दिन चर्चा में रहते हैं। इस शो में बहुत से लोग अपनी किस्मत आजमाने के लिए आते रहते हैं। सभी कंटेस्टेंट्स के साथ अमिताभ बच्चन काफी हंसी-मजाक भी करते रहते हैं। साथ ही अपने बारे में खुलासे करते रहते हैं। हाल ही में केबीसी 13 में जीएसटी इंस्पेक्टर संध्या मुखर्जी ने हिस्सा लिया।

इस शो में राजकोट की रहने वाली संध्या मुखर्जी ने शानदार खेल खेला। केबीसी 13 को खेलते हुए उन्होंने अपने बारे में ढरे सारी बातें बताई। साथ ही अमिताभ बच्चन से ऐसा सवाल पूछ लिया कि उनकी बोलती बंद हो गई। दरअसल जीएसटी इंस्पेक्टर होने के नाते संध्या मुखर्जी ने केबीसी 13 में अमिताभ बच्चन को अपने काम के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि वह उन बुरे लोगों को ढूंढकर बाहर निकालती है जो अपने टैक्स का भुगतान करना छोड़ देते हैं, और उन पर जुर्माना लगाती हैं।


संध्या मुखर्जी अमिताभ बच्चन से कहती हैं, 'सर, मैं जीएसटी डिपार्टमेंट में एक स्टेट टैक्स इंस्पेक्टर हूं। मेरा काम अच्छे लोगों के लिए चीजों को आसान बनाकर उनकी मदद करना है और बुरे लोगों के लिए जीवन कठिन बनाना है। मैं ईमानदार करदाताओं की मदद करती हूं और काला धन रखने वालों पर नजर रखता हूं।' इस पर अमिताभ बच्चन कहा, 'तो आप बुरे लोगों को अच्छे लोगों में बदल देती हैं? और अगर लोग समय पर जीएसटी का भुगतान नहीं करते हैं, तो इसके लिए उन पर जुर्माना लगाया जाता है, न?'


बिग बी की यह बात सुनकर संध्या मुखर्जी कहती हैं कि उन पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। और फिर वह अमिताभ बच्चन से पूछती हैं, 'सर, आपने तो दिया है न जीएसटी ?' संध्या मुखर्जी का यह सवाल सुनकर अमिताभ बच्चन की एक पल के लिए बोलती बंद हो जाती है। वह इधर-उधर देखाने के बाद कहते हैं, 'देवी जी, अगर हमने न भरा होता न, तो हमको यहां बैठे नहीं देते।'

केबीसी 13 को भी अपना एक करोड़पति मिल चुका है, वहीं अब शो को जल्द ही अपना दूसरा करोड़पति भी मिल सकता है। सोनी टीवी ने अपने इंस्टाग्राम पर अपकमिंग एपिसोड का प्रोमो जारी किया है जिसमें हॉस्पिटल की एक नर्स सविता 1 करोड़ के सवाल तक पहुंचती दिख रही हैं, हालांकि सविता 1 करोड़ रुपए जीत पाएंगी या नहीं इसका खुलासा प्रोमो में नहीं किया गया है। 


जल्द वीरांगनाओं की कहानियों से सजने वाला है बड़ा पर्दा

जल्द वीरांगनाओं की कहानियों से सजने वाला है बड़ा पर्दा

बायोपिक बनाने के मामले में हिंदी सिनेमा का कोई जोड़ नहीं। इसी क्रम में देश की कई वीरांगनाओं पर बन चुकीं फिल्में यह बताती हैं कि हमारे इतिहास में इनका योगदान किसी से कम नहीं। आगामी दिनों में भी अन्य कई वीरांगनाओं की कहानी दिखाता नजर आएगा बड़ा पर्दा, स्मिता श्रीवास्तव की रिपोर्ट...

‘बुंदेले हरबोलों के मुंह/हमने सुनी कहानी थी,/खूब लड़ी मर्दानी/वह तो झांसी वाली रानी थी।’ सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता की ये चंद पंक्तियां साहस और बहादुरी की मिसाल रानी लक्ष्मीबाई की वीरता और बलिदान को बयां करने के लिए काफी हैं। स्वाधीनता की मुहिम में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाली ऐसी तमाम वीरांगनाओं का जिक्र इतिहास की किताबों में मिलता है। इनके व्यक्तित्व, जीवन की कठिनाइयों, देशप्रेम और समर्पण की दास्तान को दर्शाने में हिंदी सिनेमा से लेकर टीवी सीरियल तक के निर्माता दिलचस्पी लेते रहे हैं।

सुनो उस रानी की कहानी

रानी लक्ष्मीबाई की प्रेरणात्मक कहानी पर कई फिल्में बनी हैं। 24 जनवरी, 1953 को रानी लक्ष्मीबाई की पहली बायोपिक ‘झांसी की रानी’ रिलीज हुई थी। हिंदी सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में शुमार इस फिल्म का निर्माण और निर्देशन सोहराब मोदी ने किया था। फिल्म में रानी लक्ष्मीबाई का किरदार सोहराब मोदी की पत्नी महताब ने निभाया था, जबकि वह स्वयं राजगुरु (राजकीय सलाहकार) के बेहद अहम किरदार में थे। इस फिल्म को बाद में अंग्रेजी में डब करके भी रिलीज किया गया था। इसके बाद वर्ष 2019 में रिलीज फिल्म ‘मणिकर्णिका: द क्वीन आफ झांसी’ में अभिनेत्री कंगना रनोट ने रानी लक्ष्मी बाई के विराट व्यक्तित्व को बड़े पर्दे पर उतारा था। इसमें बेहतरीन अभिनय के लिए उन्हें नेशनल अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था। उसी साल भारतीय मूल की अमेरिकी निर्देशिका स्वाती भीसे ने भी झांसी की रानी पर फिल्म ‘वारियर्स आफ क्वीन’ बनाई। नई पीढ़ी को आजादी का महत्व समझाने के लिए रानी लक्ष्मीबाई सरीखी वीरांगनाओं पर फिल्म बनाने को लेकर कंगना ने कहा था कि रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु के करीब सौ साल बाद देश को आजादी मिली थी। उस समय रानी लक्ष्मीबाई पर किताब लिखना प्रतिबंधित था। यह जब हम वर्तमान में दर्शकों को बताएंगे तो नए दौर की शुरुआत होगी। वहां से अपने इतिहास से रिश्ता जुड़ेगा।

सिर्फ बड़ा पर्दा ही नहीं वरन छोटे पर्दे पर भी रानी लक्ष्मीबाई की वीरता के किस्से समय-समय पर दर्शाए जाते रहे हैं। इन धारावाहिकों में साल 2009 में ‘एक वीर स्त्री की कहानी: झांसी की रानी’ का प्रसारण हुआ था। उसमें लक्ष्मीबाई की युवावस्था का किरदार कृतिका सेंगर ने निभाया था। इसके बाद वर्ष 2019 में कलर्स चैनल पर प्रसारित हुए धारावाहिक ‘खूब लड़ी मर्दानी-झांसी की रानी’ में अभिनेत्री अनुष्का सेन रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका निभा चुकी हैं।

क्या खूब थीं ये रानियां

आगामी दिनों में देश की कई वीरांगनाओं पर फिल्म बनाने की तैयारी है। इनमें कश्मीर की आखिरी हिंदू रानी पर फिल्म बनाने की घोषणा रिलायंस एंटरटेनमेंट और फैंटम फिल्म्स ने संयुक्त रूप से की है। कश्मीर में मुगलों के आक्रमण का आखिरी दम तक मुकाबला करने वाली कोटा रानी पर बनने जा रही फिल्म में उनकी सुंदरता से लेकर वीरगाथा को बड़े पर्दे पर उतारने की तैयारी है। कोटा रानी की कहानी जम्मू और कश्मीर की लोकगाथाओं और लोकगीतों में खूब सुनी जाती है। उन पर फिल्म बनाने के संबंध में रिलायंस एंटरटेनमेंट के ग्रुप सीईओ शिबाशीष सरकार का कहना है कि कोटा रानी पर फिल्म बनाने का हमारा मुख्य मकसद उनकी शौर्य गाथा को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है। वहीं कंगना रनोट ‘मणिकर्णिका: द क्वीन आफ झांसी’ के बाद 10वीं शताब्दी की जम्मू-कश्मीर की रानी दिद्दा पर फिल्म की तैयारी में हैं। आज के दौर में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में जन्मीं रानी दिद्दा ने बचपन से ही दिव्यांग होने के बावजूद युद्धकला सीखी। कुशल घुड़सवार, कूटनीतिक और राजनीति कुशल रानी दिद्दा से राजा अक्सर सलाह लेते थे। पति क्षेमगुप्ता के निधन के बाद दिद्दा ने पति के साथ सती होने से इन्कार कर दिया था और बेटे अभिमन्यु के लिए जीने का फैसला लिया। इसके बाद अभिमन्यु का राजतिलक हुआ। वह उसकी राज्य संरक्षक बनीं और मजबूत शासक के तौर पर उभरी थीं।

स्वतंत्रता दिलाने में दिखाई दिलेरी

इन वीरांगनाओं के साथ स्वतंत्रता सेनानी ऊषा मेहता पर फिल्ममेकर करण जौहर और केतन मेहता ने फिल्म बनाने की घोषणा की है। ऊषा मेहता ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान सीक्रेट कांग्रेस रेडियो सर्विस सेवा की शुरुआत की। उन्हें देश की पहली रेडियो वूमन भी कहा जाता है। वह स्वाधीनता के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अहिंसा के मार्ग से प्रेरित थीं। इस खुफिया रेडियो सर्विस का पहला प्रसारण 27 अगस्त, 1942 को हुआ था। इस रेडियो से पहला प्रसारण भी उनकी आवाज में ही हुआ था। हालांकि तीन माह के प्रसारण के बाद 12 नवंबर, 1942 को ब्रिटिश हुकूमत ने ऊषा मेहता और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया।

इसी क्रम में ‘भारत कोकिला’ के नाम से प्रख्यात सरोजिनी नायडू ने 1930-34 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया था। उन पर आधारित फिल्म में टीवी जगत की सीता दीपिका चिखलिया मुख्य किरदार में हैं। वहीं इससे पहले वर्ष 2017 में आई तिग्मांशु धूलिया द्वारा निर्देशित ‘राग देश’ में आजादी की लड़ाई में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अटूट अनुयायी के तौर पर आजाद हिंद फौज में शामिल कैप्टन डा. लक्ष्मी सहगल के किरदार में दक्षिण भारतीय अभिनेत्री मृदुला मुरली नजर आ चुकी हैं।

किस्से बाकी हैं कई

इनके अलावा भी इतिहास में कई वीरांगनाओं और महिला स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख है जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के आगे झुकने से इन्कार कर दिया और इतिहास में अपना नाम अमर कर गईं। इनमें रानी दुर्गावती का नाम भारत की महानतम वीरांगनाओं में अग्रिम पंक्ति में आता है। सोलहवीं शताब्दी के प्रारंभ में वीरांगना रानी दुर्गावती ने अपने जीवन काल में अनेक युद्ध लड़े और कभी हार नहीं मानी। इसी तरह कित्तूर की रानी चेनम्मा ने 1857 के विद्रोह से 33 साल पहले ही दक्षिण के राज्य कर्नाटक में शस्त्रों से लैस सेना के साथ अंग्रेजों से युद्ध किया। उन्हें आज भी कर्नाटक की सबसे बहादुर महिला के नाम से याद किया जाता है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी का नाम भी शुमार होता है। इन पर भी कई निर्माता-निर्देशक फिल्में बनाने की योजना बना रहे हैं।