नकली करेंसी पर चोट करने में सफल रही नोटबंदी

नकली करेंसी पर चोट करने में सफल रही नोटबंदी

2016 में आज ही के दिन यानी आठ नवंबर को लागू हुई नोटबंदी के बाद से लेकर अब तक विपक्ष यह कहकर केन्द्र सरकार पर हमले बोल रहा है कि नोटबंदी एक आपदा थी. इसने देश की अर्थव्यवस्था नष्ट कर दी. खैर, जो भी हो, लेकिन नोटबंदी के बाद नकली करेंसी के प्रवाह पर बहुत ज्यादा हद तक लगाम लगी है. नेशनल अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है. इसके मुताबिक, नकली करेंसी पर चोट करने में नोटबंदी सफल रही है. अब नकली करेंसी के मुद्दे व आरोपियों की संख्या घटने लगी है.

वर्ष 2016 में कुल 24.61 करोड़ रुपये की नकली करेंसी जब्त की गई. इसके अगले वर्ष 28 करोड़ रुपये मूल्य के नकली नोट जब्त हुए. अब बारी आती है 2018 की. इस दौरान कुल 17.75 करोड़ रुपये की नकली करेंसी जब्त की गई. 2019 में पहले छह माह के आंकड़े देखें तो कुल 5.05 करोड़ रुपये की नकली करेंसी पकड़ी गई है.

नोटबंदी के दौरान 24.61 करोड़ की नकली करेंसी जब्त

बता दें कि 2016 में जब नोटबंदी लागू हुई तो यह माना गया था कि देश में अब नकली करेंसी का प्रवाह बंद हो जाएगा. नोटबंदी के अगले वर्ष भले ही नकली करेंसी के मामलों में इजाफा देखने को मिला, लेकिन उसके बाद ये मुद्दे घटने प्रारम्भ हो गए. एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि नोटबंदी लागू होने के अगले ही वर्ष नकली करेंसी में अच्छा खासा इजाफा हो गया था. जिस वर्ष नोटबंदी लागू हुई, उस दौरान 24.61 करोड़ रुपये की नकली करेंसी जब्त हुई थी.

विभिन्न एजेंसियों एवं राज्यों के पुलिस बल ने इस मामले में 1398 मुद्दे दर्ज किए व 1376 आरोपियों को अरैस्ट किया. अगले वर्ष यानी 2017 में यह उम्मीद थी कि नकली करेंसी का ग्राफ अब बहुत नीचे चला जाएगा, लेकिन परिणाम इसके विपरित आया. जानकारों का बोलना है कि 2017 में नकली करेंसी का ज्यादा प्रवाह नहीं हुआ. इस दौरान ज्यादातर वही नकली करेंसी बाहर आई, जिसे आरोपियों ने कहीं न कहीं दबा रखा था. सालभर में 28 करोड़ रुपये के मूल्य के नकली नोट जब्त किए गए. ऐसे नोटों की कुल संख्या साढ़े तीन लाख से अधिक थी.

2018 में नकली करेंसी का ग्राफ नीचे आया

2017 में 28 करोड़ रुपये के मूल्य के नकली नोट जब्त किए गए. गुजरात में नौ करोड़ आठ लाख रुपये के नकली नोट, दिल्ली में छह करोड़ 78 लाख रुपये, यूपी में दो करोड़ 86 लाख रुपये, पश्चिम बंगाल में एक करोड़ 93 लाख रुपये व केरल में एक करोड़ 30 लाख रुपये की नकली करेंसी जब्त की गई. इस विषय में 978 मुद्दे दर्ज करने के अतिरिक्त 1046 आरोपी कारागार में पहुंचा दिए गए. 2018 में नकली करेंसी का प्रवाह कम हुआ. नतीजा, ऐसे मामलों की संख्या घट गई. सालभर में 17.75 करोड़ रुपये की नकली करेंसी जब्त की गई, 884 मुद्दे दर्ज हुए व 969 आरोपियों को हिरासत में लिया गया.

2019 में 5.05 करोड़ रुपये की नकली करेंसी जब्त

यदि 2019 की बात करें तो पहले छह माह के दौरान कुल 5.05 करोड़ रुपये की नकली करेंसी जब्त की गई, 254 सौ मुद्दे दर्ज हुए व 357 आरोपी अरैस्ट किए जा चुके हैं. अगर इस रिपोर्ट की तुलना गत साल के पहले छह माह से करें, तो नकली करेंसी का ग्राफ साठ-सत्तर प्रतिशत तक गिर गया है. पिछले दो सालों के दौरान नकली करेंसी को लेकर विभिन्न केंद्रीय एजेंसियां, जैसे इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई), राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) व राज्यों के पुलिस विभाग बहुत ज्यादा सक्रिय रहे हैं.

नकली करेंसी में भेद करना सरल नहीं

एनआईए के एक ऑफिसर का बोलना है कि नकली नोटों की गुणवत्ता इतनी ज्यादा उच्च होती है कि उन्हें सरलता से नहीं पहचाना जा सकता. विभिन्न राज्यों व केंद्रीय एजेंसियों ने नकली करेंसी के मुद्दे में 370 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की हैं. आरोपियों से की गई पूछताछ में पता चला है कि पिछले कई सालों से नकली नोटों में भारतीय करेंसी वाले तमाम सुरक्षा भेद डाले गए हैं. इन्हें केवल तकनीकी बारीकियों को समझने वाले बैंक कर्मचारी या फिर जाँच एजेंसियां ही पकड़ पाती हैं. आम लोग सरलता से इस करेंसी को नहीं पहचान पाते.

दिल्ली नकली करेंसी का केन्द्र बनी

दिल्ली या दूसरे राज्यों में जितनी भी नकली करेंसी पकड़ी गई है, वह पाक की उच्च गुणवत्ता वाली प्रेस में छपी हैं. राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) तो पहले ही अपनी जाँच रिपोर्ट में कह चुकी है कि नकली नोट बनाने के लिए जिस स्याही का प्रयोग किया गया है, उसका प्रयोग पाकिस्तानी करेंसी छापने के लिए किया जाता है. दक्षिण एवं दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र में बने आत्मनिर्भर आपराधिक नेटवर्क के जरिए ये नकली करेंसी हमारे देश में पहुंचाई जाती है. वहीं दिल्ली नकली करेंसी का केन्द्र बन चुकी है.

प्रियंका गांधी ने साधा केन्द्र पर निशाना

कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी व मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने नोटबंदी को लेकर केन्द्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने अपने ट्वीट में बोला कि आठ नवंबर, 2016 को आज के दिन यह तुगलकी फरमान जारी हुआ था. तीन वर्ष बीत गए हैं, लेकिन नोटबंदी का परिणाम पूरा देश भुगत रहा है क्योंकि अर्थव्यवस्था चौपट है, रोजगार खत्म, न आतंकवाद रुका, न जाली नोटो का कारोबार, फिर कौन है जिम्मेदार.

सरकार व इसके नीम हकीमों के किए गए सभी दावे कि 'नोटबंदी सारी बीमारियों का शर्तिया इलाज' है, एक-एक कर फेल हो गए. नोटबंदी एक आपदा थी, जिसने हमारी अर्थव्यवस्था नष्ट कर दी. नोटबंदी की तीसरी बरसी पर अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने देश की अर्थव्यवस्था के आउटलुक को नेगेटिव बता कर फिर साबित कर दिया कि नोटबंदी, 'मानव निर्मित एक भयावह आपदा थी' सत्ता के गलियारों में बैठे हुक्मरान, मौन क्यों हैं.