बिहार लोजपा अध्यक्ष प्रिंसराज से एक करोड़ मांग रही थी युवती, सांसद ने दे दिए थे ढाई लाख रुपये

बिहार लोजपा अध्यक्ष प्रिंसराज से एक करोड़ मांग रही थी युवती, सांसद ने दे दिए थे ढाई लाख रुपये

लोजपा (पारस गुट) के प्रदेश अध्यक्ष एवं समस्तीपुर के सांसद प्रिंस राज पर एक 30 वर्षीय युवती ने दुष्कर्म का आरोप लगाया है। दिल्ली स्थित कनाट प्लेस थाने में युवती ने शिकायत की है। हालांकि अभी प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि शिकायत करने वाली युवती के खिलाफ प्रिंस राज ने पैसे मांगने को लेकर पहले ही मुकदमा दर्ज करा रखा है। इसलिए पहले उसके आरोप की जांच की जाएगी। आरोप सही पाए जाने पर ही प्राथमिकी दर्ज होगी। पारस गुट का कहना है कि युवती झूठे आरोप लगा रही। वहीं चिराग गुट ने कहा कि चिराग पासवान पर किसी ने धमकी देने का कोई आरोप नहीं लगाया है। बहरहाल लोक अभियोजक (सरकारी वकील) से कानूनी राय ली जा रही है। उस आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी। 

मिली जानकारी के मुताबिक, सन् 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान युवती लोजपा से जुड़ी थी। इंटरनेट मीडिया के जरिये ही प्रिंस से उसका परिचय हुआ था। युवती ने आरोप लगाया है कि 2020 के मार्च में प्रिंस ने उसे वेस्टर्न कोर्ट में बुलाया। नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ पहली बार दुष्कर्म किया। उसके बाद उन्होंने कई बार दुष्कर्म किया।

पैसों के लिए बना रही थी बार-बार दबाव

कनाट प्लेस थाने की पुलिस का कहना है कि युवती काफी समय से प्रिंस को ब्लैकमेल कर रही थी। वह उनसे एक करोड़ रुपये मांग रही थी। प्रिंस ने करीब ढाई लाख दे भी दिए। पैसे के लिए बार-बार दबाव बनाने पर चार महीने पहले पार्लियामेंट रोड स्थित थाने में प्रिंस ने युवती के खिलाफ केस दर्ज कराया था।

चार वर्षों से है रिलेशनशिप में, हनी ट्रैप के धंधे में शामिल


लोजपा (पारस गुट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रवण अग्रवाल ने बताया कि युवती झूठे आरोप लगा रही। 10 फरवरी को मंगेतर अमर सहित उस युवती के खिलाफ ब्लैकमेल करने की प्राथमिकी दर्ज हुई है। पुलिस तफ्तीश कर रही है। सच्चाई सामने आ जाएगी। श्रवण के मुताबिक चार वर्षों से युवती और अमर लिव इन रिलेशनशिप में हैं। वे हनी ट्रैप के धंधे में संलिप्त हैं। इधर, लोजपा (चिराग गुट) के प्रदेश अध्यक्ष राजू तिवारी का कहना है कि हमारे नेता चिराग पासवान पर किसी ने धमकी देने का कोई आरोप नहीं लगाया है।


बिहार में जमीन से जुड़े विवादों की सुनवाई फिर शुरू करेंगे डीसीएलआर

बिहार में जमीन से जुड़े विवादों की सुनवाई फिर शुरू करेंगे डीसीएलआर

डीसीएलआर (भूमि सुधार उप समाहर्ता) फिर से जमीन से जुड़े विवादों की सुनवाई कर सकेंगे। वे किसी विवादित जमीन के बारे में यह तय करेंगे कि इसका वास्तविक मालिक कौन है। इसे टाइटिल सूट या स्वत्ववाद कहते हैं। करीब आठ साल से चल रहे अदालती विवाद में सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद डीसीएलआर को यह अधिकार मिल गया है। इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव विवेक कुमार सिंह ने गुरुवार को आदेश जारी कर दिया है। 

मालूम हो कि बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम 2009 के जरिए डीसीएलआर को भूमि विवाद की सुनवाई करने का अधिकार दिया गया था। व्यवहार न्यायालयों से यह अधिकार वापस ले लिया गया था। इस अधिनियम को महेश्वर मंडल नामक रैयत ने 2013 में पटना हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट में पांच साल तक सुनवाई चली। हाई कोर्ट ने 2018 में आदेश दिया कि डीसीएलआर टाइटिल सूट  की सुनवाई नहीं करेंगे। इस पर अमल करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने नवम्बर 2018 में आदेश जारी कर डीसीएलआर को अदालती सुनवाई करने से रोक दिया। हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ विभाग सुप्रीम कोर्ट गया। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश के उस हिस्से को स्थगित कर दिया, जिससे डीसीएलआर को सुनवाई से रोका गया था। राजस्व विभाग ने गुरुवार को कहा कि वह नवम्बर 2019 के अपने आदेश को वापस ले रहा है, जिसके जरिए डीसीएलआर को सुनवाई करने से रोका गया था।  अब डीसीएलआर रैयती मामलों से संबंधित वादों की सुनवाई शुरु करेंगे। वे पूर्व के मामलों में पारित आदेशों का कार्यान्वयन भी करेंगे। 


इन मामलों की होगी सुनवाई

अतिक्रमण, अनाधिकृत संरचना निर्माण, सीमा विवाद, आवंटित बंदोबस्तधारी की बेदखली, भूखंड का विभाजन, सर्वे नक्शा सहित स्वामित्व के अभिलेख में दर्ज विवरण में संशोधन। राजस्व विभाग के ताजा आदेश के बाद इन मामलों की सुनवाई अब व्यवहार न्यायालयों में नहीं होगी।