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तब फ्री ऐप से 1 मिनट में करें रिपेयर, फोन की टचस्क्रीन कर रही स्लो रिस्पॉन्स

तब फ्री ऐप से 1 मिनट में करें रिपेयर, फोन की टचस्क्रीन कर रही स्लो रिस्पॉन्स

Smart Phone में कई हैंग होने की प्रॉब्लम आ जाती है. इसके चलते स्क्रीन का रिस्पॉन्स भी लेट हो जाता है. वॉट्सऐप, वीडियो या म्यूजिक की लिस्ट को जब स्क्रॉल किया जाता है, तब वो अटक-अटक कर ऊपर या नीचे होती है. इस तरह की प्रॉब्लम फोन के गिरने से भी हो सकती है. इस तरह की प्रॉब्लम को टचस्क्रीन रिपेयर (Touchscreen Repair) ऐप से ठीक किया जा सकता है. इस ऐप में दिए गए इंस्ट्रक्शन को अनुसरण करके 1 मिनट में स्क्रीन को रिपेयर किया जा सकता है.

स्क्रीन के लेट रिस्पॉन्स का कारण


फोन की मेमोरी में स्पेस कम होता है, तब अक्सर फोन हैंग के साथ स्क्रीन का टच भी लेट रिस्पॉन्स करता है. फोन में कई बार यूजर्स हैवी ऐप्स इन्स्टॉल कर लेते हैं, जिसकी वजह से भी स्क्रीन हैंग करती है. आपका फोन अगर हीट हो रहा है तब भी स्क्रीन हैंग होने की प्रॉब्लम आने लगती है.

टचस्क्रीन रिपेयर ऐप


इस ऐप को उपभोक्ता गूगल प्ले स्टोर से फ्री इन्स्टॉल कर सकते हैं. ऐप का मिनिमम साइज 1.1MB है. हालांकि, अलग डिवाइस पर ये अलग स्पेस लेता है. इस ऐप को अब तक 50 लाख से ज्यादा बार इन्स्टॉल किया गया है. इस ऐप को एंड्रॉइड वर्जन 4.0.3 आइसक्रीम सेंडविच व उससे अपडेट पर इन्स्टॉल कर सकते हैं. ऐप को 185,945 यूजर्स ने 4.5 स्टार रेटिंग दी है.

टचस्क्रीन रिपेयर ऐप के फीचर्स


ये स्क्रीन के टच लेग्स को रिमूव करके उसे इम्प्रूव करता है. इस प्रॉसेस के बाद स्क्रीन का टच बेहतर रिस्पॉन्स करने लगता है. ऐप स्क्रीन के टच रिस्पॉन्स टाइम को भी कम कर देता है. यानी वो तेजी से रिस्पॉन्स करती है. ये रोशनी ऐप है, जिसमे अनवांटेड ग्राफिक्स भी नहीं हैं.

स्मार्टफोन की स्क्रीन का टच ऐसे फास्ट करें

Touchscreen repair App फ्री ऐप है, इस उपभोक्ता प्ले स्टोर से फ्री इन्स्टॉल कर सकता है. ये करीब 6MB का ऐप है. यानी ये फोन में ज्यादा स्पेस नहीं लेता. कंपनी ने इस इसे रोशनी ऐप भी बताया है.

ऐप को ओपन करने पर एक मैसेज आता है. जिसमें इसकी वर्किंग प्रॉसेस व बेस्ट रिजल्ट के बारे में पूरी डिटेल होती है. यहां से आगे बढ़ने पर ऐप को स्टार्ट किया जाता है. START पर टैब करने पर एक नया मैसेज आता है. जिसमें उपभोक्ता को यूज करने के टिप्स दिए जाते हैं.

यूजर को अब ग्रीन एरिया के सेंटर में टैब करना होता है. टैब करने के साथ ही स्क्रीन रिपेयर की प्रॉसेस भी प्रारम्भ हो जाती है. एक-एक करके चार एरिया में टैब करना होता है. ध्यान रहे यहां पर उपभोक्ता को जल्दी से टैब करना होता है.

यदि उपभोक्ता ग्रीन एरिया पर टैब न करके लॉन्ग प्रेस करता है या फिर उंगली को स्लिप करता है, तो वो टैब काउंट नहीं करता. जब प्रॉसेस पूरी हो जाती है तब ये आपके Smart Phone का मॉडल व ऑपरेटिंग सिस्टम की डिटेल देता है. आखिर में Success का मैसेज आता है. जिसमें स्क्रीन के टच का नया रिस्पॉन्स टाइम होता है.


सरकार को बड़ा नुकसान! दिल्ली-NCR में पेट्रोल-डीजल और CNG की खपत में भारी गिरावट

सरकार को बड़ा नुकसान! दिल्ली-NCR में पेट्रोल-डीजल और CNG की खपत में भारी गिरावट

लॉकडाउन में वाहनों के पहिए थमने से ईंधन की मांग में भारी गिरावट आई है. दिल्ली एनसीआर में पेट्रोल-डीजल के साथ ही सीएनजी की मांग में 85 से 90 फीसद तक की गिरावट आ गई है. वैसे, सारे दुनिया में यहीं दशा है, इसलिए वैश्विक स्तर पर पेट्रो पदार्थों की मांग में तेज गिरावट आई है. इसलिए वैश्विक स्तर पर इनके दाम में गिरावट आई है. पर दिल्ली में मांग में जबरदस्त गिरावट का प्रभाव दिल्ली सरकार के राजस्व में दिखना स्वभाविक है.

पेट्रो पदार्थ चीज एवं सेवा कर (जीएसटी) की स्थान वैट में आता है. लॉक डाउन में व्यक्तिगत वाहनों के साथ व्यावसायिक वाहनों को चलाने पर पाबंदी है. केवल महत्वपूर्ण सेवा से जुड़े वाहन व जरूरी महत्वपूर्ण वस्तुएं ले जाते व्यावसायिक वाहनों को ही चलाने की अनुमति है. मांग में ऐतिहासिक गिरावट के चलते वैसे सीएनजी गैस प्रदाता कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने अपने 520 स्टेशनों में से 465 स्टेशनों की सेवा स्थगित कर डी है. इन्हें बंद कर दिया गया है. बाकि के 55 स्टेशनों पर भी सीमित सुविधा ही उपलब्ध है.

हालांकि, दिल्ली में उपस्थित 400 से अधिक पेट्रोल पंप स्टेशन संचालित तो हो रहे हैं पर इनके सभी पंपों की स्थान एक-दो पंप चलाए जा रहे हैं. वहीं, कर्मचारियों की संख्या घटा दी गई है. सामान्य दिनों में एक पेट्रोल पंप पर 15 से 20 कर्मचारियों की स्थान मात्र 2 या 4 कर्मचारी ही सेवा में लगे हैं. पेट्रोल पंप संचालकों के मुताबिक अगर ये महत्वपूर्ण सेवा में नहीं आता तो वह अधिकतर पेट्रोल पंप बंद कर देते, लेकिन महत्वपूर्ण सेवाओं से जुड़े वाहनों की सुविधा को देखते हुए सभी पेट्रोल पंपों को चलाया जा रहा है. दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल बिजलानी के मुताबिक लॉक डाउन में सड़क पर केवल पुलिस, अस्पताल, महत्वपूर्ण सेवा से जुड़े विभाग व आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई करते वाहनों को ही चलने की अनुमति है. मीडिया के वाहनों को चलने की अनुमति है.

दिल्ली सार्वजनिक परिवहन निगम ( डीटीसी) की 25 फीसद बसें भी सड़क पर है. बाकि व्यक्तिगत बसें व ट्रकों के अतिरिक्त सड़क पर आम दिनों में उतरने वाले तकरीबन 90 वाहन सड़कों से गायब है. इसलिए मांग एकदम से घट गई है. दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष निश्चल सिंघानिया ने बताया कि पेट्रोल में जहां 10 फीसद वहीं, डीजल की मांग कठिन से 15 फीसद तक है. जबकि सामान्य दिनों में दिल्ली में पेट्रोल की खपत प्रति माह 10 करोड़ लीटर और डीजल की 8 करोड़ लीटर है.

वैश्विक महामारी कोरोना को देखते हुए नहीं लगता कि यह लॉकडाउन इस माह के मध्य तक समाप्त होगा. इसी तरह आम दिनों में आइजीएल स्टेशनों से दिल्ली-एनसीआर में 34-35 लाख किलो सीएनजी की खपत होती है. जो घटकर कठिन से 4-5 लाख किलो ही रह गई है. इसी को देखते हुए आइजीएल ने अपने अधिकतर स्टेशन बंद कर दिए हैं. वैसे, पेट्रोल पंप स्टेशनों पर उपस्थित सीएनजी पंप चल रहे हैं. वहां भी मांग कमोबेश यहीं है. मांग में इस कमी का प्रदेश सरकार के राजस्व पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा.

दिल्ली सरकार द्वारा 27. 5 फीसद पेट्रोल और डीजल पर 16. 5 फीसद वैट वसूला जाता है. जो प्रदेश सरकार के राजस्व का बड़ा भाग होता है. एक पेट्रोल पंप के मालिक निशिथ गोयल ने बोला कि मौजूदा समय में पेट्रोल पंप चलाना कठिन भरा है, क्योंकि कर्मचारी भी कोरोना को लेकर डरे हुए हैं. उनका लोगों से सीधे सम्पर्क होता है. वैसे, उन्हें महत्वपूर्ण बचाव बंदोवस्त दिए गए हैं. बुजुर्ग व मधुमेह, ब्लडप्रेसर के मरीजों को भी सेवा से अलग रखा गया है.