द्रौपदी मुर्मू के नामांकन के दौरान मौजूद नहीं रहेंगे नवीन पटनायक

द्रौपदी मुर्मू के नामांकन के दौरान मौजूद नहीं रहेंगे नवीन पटनायक

नयी दिल्ली:  बीजेपी (BJP) के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने बुधवार को ओड़िशा के सीएम नवीन पटनायक (Odisha सीएम Naveen Patnaik) से टेलीफोन पर बात की और उनसे राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) द्वारा नामांकन पत्र दाखिल किए जाने के दौरान मौजूद रहने का आग्रह किया.

चूंकि पटनायक इटली के दौरे पर हैं, इसलिए उन्होंने अनुपलब्धता के लिए खेद जताते हुए अपने मंत्रिमंडल के दो सहयोगियों, जगन्नाथ सारका और टुकुनी साहू को मुर्मू के नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर करने और नामांकन के दौरान उपस्थित रहने को बोला है. सारका पटनायक मंत्रिमंडल में अनुसूचित जाति और जनजाति विकास मंत्री हैं जबकि टुकुनी साहू के पास जल संसाधन, वाणिज्य और परिवहन मंत्रालय का जिम्मा है.

पटनायक एक ट्वीट में कहा, ‘‘भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू के नामांकन के संदर्भ में मुझसे बात की. मेरे मंत्रिमंडल के सहयोगी जगन्नाथ सारका और टुकुनी साहू आज नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे और कल नामांकन कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे.

मुर्मू बृहस्पतिवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगी. इस दौरान पीएम मोदी सहित राजग के विभिन्न वरिष्ठ नेता उनके साथ उपस्थित होंगे. बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष पटनायक ने मुर्मू को ‘‘राज्य की बेटी” बताकर उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया है.

उन्होंने बुधवार को राज्य विधानसभा के सभी सदस्यों से अपील की कि वे राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव में राजग उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करें. ओडिशा की 147 सदस्यीय विधानसभा में सत्ता में विराजमान बीजद के 114 विधायक हैं. इसके अतिरिक्त बीजेपी के 22 और कांग्रेस पार्टी के नौ सदस्य और माकपा का एक सदस्य है.

एक निर्दलीय विधायक भी है. राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 18 जुलाई को होना है. इसके लिए नामांकन 29 जून तक भरा जा सकेगा और चुनाव रिज़ल्ट की घोषणा 21 जुलाई तक हो जाएगी. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है. 


आइए जानते हैं उस पिंगली वेंकैया के बारे में, जिनकी कल्पना ने हमें हमारा राष्ट्रीय ध्वज दिया

आइए जानते हैं उस पिंगली वेंकैया के बारे में, जिनकी कल्पना ने हमें हमारा राष्ट्रीय ध्वज दिया

आज भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के अभिकल्पक पिंगली वेंकैया जी की जयंती है. वही पिंगली वेंकैया जिन्होंने तिरंगे को डिजाइन किया था. हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा. जो हमारी आन-बान एवं शान का प्रतीक है. जो भारतीय राष्ट्रवाद को अपने में समाहित किए हुए है. आइए जानते हैं उस पिंगली वेंकैया के बारे में, जिनकी कल्पना ने हमें हमारा राष्ट्रीय ध्वज दिया.

पिंगली वेंकैया का जन्म 2 अगस्त 1876 को आंध्र प्रदेश में मचिलीपट्टनम के एक छोटे से गांव में हुआ था. केवल 19 साल की उम्र में पिंगली ब्रिटिश आर्मी में सम्मिलित हो गए. मगर उन्हें तो देशसेवा में जाना था. दक्षिण अफ्रीका में पिंगली वेंकैया की मुलाकात महात्मा गांधी से हुई. वो बापू से इतने प्रभावित हुए कि उनके साथ हमेशा के लिए रहने वो हिंदुस्तान लौट आए. पिंगली ने स्वतंत्रता संग्राम में अपना जरूरी सहयोग दिया. पिंगली भाषा जानकार एवं लेखक थे. 1913 में उन्होंने जापानी भाषा में लंबा भाषण पढ़ा था. इनकी इन्हीं खूबियों के कारण उन्हें कई नाम मिले. मसलन- जापान वेंकैया, पट्टी (कॉटन) वेकैंया और झंडा वेंकैया. उन्होंने 30 राष्ट्रों के राष्ट्रीय ध्वज का शोध किया. पिंगली वेंकैया 1916 से लेकर 1921 तक लगातार इस पर अध्ययन करते रहे. तत्पश्चात, उन्होंने तिरंगे को डिजाइन किया. 1916 में उन्होंने भारतीय झंडे के डिजाइन को लेकर एक पुस्तक भी लिखी. उस समय तिरंगे में लाल रंग रखा गया, जो हिंदुओं के लिए था. हरा रंग मुसलमान धर्म के प्रतीक के रूप में रखा गया तथा सफेद बाकी धर्मों के प्रतीक के रूप में. बीच में चरखे को स्थान दी गई थी. 1921 में महात्मा गांधी ने कांग्रेस पार्टी के विजयवाड़ा अधिवेशन में पिंगली वेंकैया के डिजाइन किए तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अनुमति दे दी.

महात्मा गांधी ने यंग इण्डिया में पिंगली वेंकैया के बारे में लिखा था कि ‘पिंगली वेंकैया आंध्र प्रदेश के मचिलीपट्टनम नेशनल कॉलेज में काम करते हैं. उन्होंने कई राष्ट्रों के झंडे का अध्ययन करके हिंदुस्तान के राष्ट्रीय झंडे के कई डिजाइन बनाकर दिए हैं. इसको लेकर उन्होंने एक पुस्तक भी लिखी है. मैं उनके कड़ी मेहनत की सराहना करता हूं.’ 1931 में तिरंगे को अपनाने का प्रस्ताव पारित हुआ. इसमें कुछ संशोधन किया गया. लाल रंग के जगह पर केसरिया को जगह दिया गया. 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा में इसे राष्ट्रीय ध्वज के रूप से अपनाया गया. इसके कुछ वक़्त पश्चात् फिर संशोधन हुआ और चरखे के जगह पर अशोक चक्र को जगह दिया गया. कहा जाता है कि चरखे को हटाने के कारण महात्मा गांधी नाराज हो गए थे. अभी हमारे तिरंगे में केसरिया का अर्थ- समृद्धि, सफेद मतलब – शांति और हरा मतलब प्रगति से है. वही राष्ट्र को तिरंगा देने वाले पिंगली की मृत्यु बहुत गरीबी में हुई. 1963 में पिंगली वेंकैया का देहांत एक झोपड़ी में रहते हुए हो गया. तत्पश्चात, पिंगली की याद तक को लोगों ने भुला दिया. 2009 में पहली बार पिंगली वेंकैया के नाम पर डाक टिकट जारी हुआ. तब लोगों को पता चला कि वो पिंगली ही थे, जिन्होंने हमें हमारा तिरंगा दिया. मौत के 46 साल पश्चात् उन्हें राष्ट्र ने सम्मान दिया था.