मदनपुर खादर में गैर कानूनी निर्माण के विरूद्ध बड़े स्तर पर कार्रवाई

मदनपुर खादर में गैर कानूनी निर्माण के विरूद्ध बड़े स्तर पर कार्रवाई

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम द्वारा बृहस्पतिवार को मदनपुर खादर में गैर कानूनी निर्माण के विरूद्ध बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई. इस दौरान तीन इमारतों पर निगम ने बुलडोजर चलाया. जिन बिल्डिंगों को गिराया गया, उनमें से एक मकान मालिक ने दिल्ली पुलिस और एमसीडी पर करप्शन के गंभीर आरोप लगाए हैं.


क्षेत्रीय निवासी नौशाद ने बताया कि दिल्ली पुलिस और एमसीडी ने उसके भाई से 20 दिन पहले ही रुपये लेकर निर्माण कार्य करने की अनुमति दी थी. इसके बावजूद उनका मकान तोड़ दिया गया. उसके भाई ने एक किसान से प्लॉट खरीदा था, उसके पास इसके कागज हैं.

इसके लिए एमसीडी ने तीन लाख रुपये लिए और अब उसका मकान भी तोड़ दिया गया. वह मौजूदा समय कुछ भी बोल पाने की स्थिति में नहीं है. एक अन्य क्षेत्रीय निवासी ने बोला कि कब्ज़ा के विरूद्ध चल रही यह पूरी कार्रवाई राजनीति सेे प्रभावित है.

इस पूरे क्षेत्र में कोई कब्ज़ा नहीं है. यदि कोई इमारत गैर कानूनी ढंग से बनाई भी गई है तो एमसीडी वाले तब कहां पर थे जब इनका निर्माण कार्य प्रारम्भ किया जा रहा था.

रात में कोर्ट में पेश किए विधायक, फिर भेजा जेल
दक्षिण-पूर्व जिले की कालिंदी कुंज थाना पुलिस ने मदनपुर  खादर में कब्ज़ा हटाने के मुद्दे में ओखला से आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह को उनके पांच समर्थकों के साथ बृहस्पतिवार  रात में ही न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें कारागार भेज दिया गया.

दक्षिण-पूर्व जिला डीसीपी ईशा पांडेय ने बताया कि विधायक व उनके समर्थकों के विरूद्ध कालिंदी कुंज थाने में दंगा भड़काने व सरकारी काम में बाधा डालने का मामला  दर्ज किया गया है. इसके बाद विधायक व उनके पांच समर्थकों अरैस्ट कर लिया गया. रात में उन्हें न्यायालय में पेश किया गया था.  कोर्ट ने विधायक व उसके समर्थकों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. ब्यूरो

मुझे कैद कर सकते हो, हौसलों को नहीं : अमानतुल्ला
आप विधायक अमानतुल्ला खान की गिरफ्तारी के बाद उनके आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया कि बीजेपी के बुलडोजर तंत्र का विरोध कर रही जनता पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज असांविधानिक है. हम बीजेपी की जनविरोधी नीतियों के विरूद्ध हैं. जनता के अधिकार की आवाज मैं हमेशा उठाता रहूंगा. इसके लिए मुझे चाहे कितनी बार भी कारागार क्यों न जाना पड़े. दिल्ली पुलिस ने मुझे अरैस्ट कर लिया है. मुझे कैद कर सकते हैं मेरे हौसलों को नहीं


मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मीटिंग जारी

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की मीटिंग जारी

काशी में ज्ञानवापी मस्जिद मुद्दे व अन्य मसलों पर ऑल इण्डिया मुसलमान पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपनी एक्सिक्यूटिव कमेटी की आपात बैठक बुलाई, जिसमें कुछ बड़े निर्णय लिए गए हैं, क्योंकि मामला न्यायालय में है इसलिए बैठक में यह फैसला लिया गया है बोर्ड की लीगल कमेटी मुकदमा को लड़ने में मुसलमान पक्ष की हर संभव सहायता करेगी.

दूसरा केंद्र गवर्नमेंट सहित अन्य सियासी पार्टियों से 1991 के वर्शिप एक्ट पर उनका पक्ष जानेगी. इसके अतिरिक्त बोर्ड के मुताबिक, तमाम ढंग की बातों जनता के सामने अधूरा रखा जा रहा है. उसके लिए बोर्ड पैम्पलेट व बुक्स छपवाने का काम करेगी, जिनमें तथ्यों के साथ जानकारी हो और उन्हें जनता तक पहुंचाने का काम करेगी.

इस मीटिंग में ज्ञानवापी, टीपू सुल्तान मस्जिद समेत राष्ट्र के अन्य मौजूदा मसलों पर चर्चा की गई, बैठक करीब 2 घण्टे चली, बोर्ड के 45 सदस्य औनलाइन माध्यम से एक दूसरे से जुड़े.

सूत्रों ने आईएएनएस को जानकारी देते हुए बताया कि, न्यायालय में मुकदमा होने के चलते बोर्ड की लीगल कमिटी मुसलमान पक्ष की पूरी सहायता करेगी, वहीं मंगलवार को न्यायालय में जो बातें सामने आई हैं, उनपर काम कर आगे की सहायता करेगी. साथ ही तमाम तरह की बातों को जनता तक पहुंचाया जा रहा है जिससे बटवारा हो, लेकिन जनता के सामने हमारी आवाज पहुंच नहीं पा रही, क्योंकि लोगों को गुमराह किया जा रहा है. इसलिए हम पैम्पलेट, बुक्स व अन्य माध्यमों से डॉक्यूमेंटेशन करेंगे और जनता तक पहुंचाएंगे.

तीसरा हम केंद्र गवर्नमेंट से व अन्य सियासी पार्टियों से इस 1991 वर्शिप एक्ट कानून पर उनका पक्ष जानेंगे.

दरअसल 1991 में तत्कालीन पीएम पीवी नरसिम्हा राव गवर्नमेंट ने पूजा स्थल कानून लेकर आई थी. इस कानून के अनुसार 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता. यदि कोई ऐसा करने की प्रयास करता है तो उसे एक से तीन वर्ष तक की कारागार और जुर्माना हो सकता है. अयोध्या का मामला उस समय न्यायालय में था इसलिए उसे इस कानून से अलग रखा गया था.

इसके अतिरिक्त बैठक में मुसलमान पर्सनल लॉ बोर्ड भविष्य की कार्रवाई के बारे में निर्णय लिया गया है, बांकी बुधवार को बोर्ड विस्तार से अपने फैसलों को सबके सामने रखेगा, वहीं राष्ट्र में चल रहे मौजूदा मामलों को लेकर रणनीति बनाई गई है.

इस मुद्दे की उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई जिसमें न्यायालय ने बोला कि हम नोटिस जारी कर रहे हैं और क्षेत्रीय डीएम को आदेश देना चाहते हैं कि जहां शिवलिंग मिला है, उस स्थान को सुरक्षित रखा जाए. लेकिन, लोगों को नमाज से ना रोका जाए. दरअसल ज्ञानवापी में शिवलिंग मिलने का दावा किया गया है, लेकिन मुसलमान पक्ष का बोलना है कि यह फव्वारा है.

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई समाचार है इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है ऐसे में संबंधित समाचार को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी