पॉपकॉर्न बेचने के लिए दुकानदार ने लगाया ऐसा जुगाड़, दुनिया दे रही है शाबाशी

पॉपकॉर्न बेचने के लिए दुकानदार ने लगाया ऐसा जुगाड़, दुनिया दे रही है शाबाशी

व्यक्ति की दृढ इच्छा शक्ति के आगे कुछ भी कठिन नहीं है। व्यक्ति अगर चाह लें, तो जीवन में सकारात्मक चीजों को अपनी मेहनत से हासिल कर सकता है। कुछ लोग महज चार दिनों की मेहनत में सफलता पाना चाहते हैं, लेकिन सफल होने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी है। इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण सोशल मीडिया पर शेयर वीडियो से मिलता है। यह वीडियो प्रेरणादायक है। खासकर युवावर्ग को जीवन में कुछ कर गुजरने के लिए प्रेरित करता है। वीडियो से यह साबित होता है कि अगर व्यक्ति चाह ले, तो किसी भी क्षेत्र में अपना नाम रौशन कर सकता है।


इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कोयंबटूर में एक पॉपकॉर्न बेचने वाला दुकानदार संगीत बजाकर पॉपकॉर्न बेच रहा है। यह संगीत किसी रेडियो, टेपरिकॉर्डर या मोबाइल फोन से नहीं बज रही है, बल्कि पॉपकॉर्न की बर्तनों से निकल रही है। संगीत की आवाज इतनी मधुर है कि आप सुनकर संगीतमय हो जाएंगे। पॉपकॉर्न बेचने वाला दुकानदार महज कलछुल और बर्तनों की मदद से बेहतरीन धुन बजा रहा है। साथ ही पॉपकॉर्न को भी मिक्स कर रहा है।

 
संगीत को मधुर बनाने के लिए पिच (धुन की लय) को भी समय-समय पर बदलता है। इसके लिए आसपास में कई बर्तन रखी हैं, जिनमें पॉपकॉर्न से संबंधित खाद्य पदार्थ हैं। उन बर्तनों पर कलछुन लगाकर मधुर आवाज निकाली जा रही है। वहीं, जब दुकानदार पॉपकॉर्न सर्व करता है। उस समय भी धुन निकलती रहती है। व्यक्ति की प्रतिभा काबिलेतारीफ है।

सोशल मीडिया पर लोग वीडियो को पसंद कर रहे हैं। किसी ने सही कहा है-प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती है। इस वीडियो को देख ऐसा लगता है कि भारत में प्रतिभावान की बिल्कुल कमी नहीं है। इस वीडियो को UncleRandom नामक शख्स ने सोशल मीडिया ट्विटर पर अपने अकांउट से शेयर किया है। इस वीडियो को खबर लिखे जाने तक तकरीबन 1 हजार बार देखा गया है।


ये डॉक्टर बना मानवता की मिशाल, किडनी ट्रांसप्लांट किया, मरीज को खून भी दिया

ये डॉक्टर बना मानवता की मिशाल, किडनी ट्रांसप्लांट किया, मरीज को खून भी दिया

भोपाल हमीदिया हॉस्पिटल को प्रदेश में पहला किडनी ट्रांसप्लांट करने का खिताब मिल चुका है. इस ट्रांसप्लांट यूनिट को प्रारम्भ कराने के लिए डाक्टर हिमांशु शर्मा बीते पांच वर्षों से कोशिश कर रहे थे.
जब पहले ट्रांसप्लांट की घड़ी आई तो मरीज का हीमोग्लोबिन कम निकला. ट्रांसप्लांट के लिए करीब 6 यूनिट ब्लड की आवश्यकता थी. मरीज के बेटे राजीव शर्मा ने कोशिश किया लेकिन ओ पॉजीटिव ग्रुप का ब्लड नहीं मिल पा रहा था जब इसकी जानकारी डाक्टर हिमांशु शर्मा को लगी तो उन्होंने स्वयं ब्लड दिया. बुधवार को हमीदिया में मुरैना से पहुंचे मरीज केशव दत्त शर्मा के संबंधियों ने डाक्टर शर्मा के सरेंडर की सराहना की.


अब मिली सफलता
डाक्टर हिमांशु शर्मा ने 2017 में एमडी करने के बाद हमीदिया हॉस्पिटल में ज्वाइनिंग दी थी. तभी से वे यहां किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट प्रारम्भ करने के कोशिश में जुट गए. डेढ़ वर्ष पहले आई कोविड-19 महामारी ने उनके कोशिश को रोक दिया लेकिन जैसे ही मरीज कम हुए उन्होंने फिर अपनी मुहिम प्रारम्भ की और 7 सितंबर को मुरैना के पोरसा निवासी केशव दत्त शर्मा को उनकी पत्नी की किडनी प्रत्यारोपित कर प्रदेश में पहले सरकारी ट्रांसप्लांट करने वाले हॉस्पिटल में शामिल किया.

तीन दिन में डिस्चार्ज
केशव दत्त शर्मा के बेटे राजीव ने बताया कि दो-तीन दिन में हॉस्पिटल से माता-पिता को डिस्चार्ज किया जाएगा. इस मौके पर पूरा परिवार हॉस्पिटल पहुंचकर डाक्टर हिमांशु और पूरी टीम को धन्यवाद देंगे.