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21 दिन का लॉकडाउन इसलिए है अहम, 30% संक्रमितों में नजर नहीं आते लक्षण

21 दिन का लॉकडाउन इसलिए है अहम, 30% संक्रमितों में नजर नहीं आते लक्षण

कोरोना वायरस फैलने के खतरे को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने सारे हिंदुस्तान में 21 दिन के लिए लॉकडाउन की घोषणा कर दी है। अब सवाल ये उठता है कि उन्‍होंने 21 दिन का ही लॉकडाउन क्‍यों केिया? दरअसल, हाल में एक शोध में बताया गया था कि  COVID-19 से संक्रमित एक तिहाई लोगों में कोरोना वायरस का कोई लक्षण सामने नहीं आता है। ऐसे लोग अनजाने में संक्रमण फैलने के सबसे बडे कारण बन जाते हैं। वहीं, स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना के लक्षण 14 दिन तक सामने आ सकते हैं।  इसीलिए संदिग्‍ध लोगों को 14 दिन के क्‍वारंटीन की एहतियात बरतने को बोला जा रहा है।

सरल शब्‍दों में समझें तो बिना लक्षणों वाला सं‍क्रमित व्‍यक्ति 14 दिन तक किसी भी व्‍यक्ति को संक्रमित कर सकता है।   ऐसे में अगर 21 दिन तक लोग घरों में रहने से या तो संक्रमित लोगों में लक्षण नजर आने लगेंगे या वो अच्छा हो जाएंगे। अगर लक्षण स्‍पष्‍ट हो जाते हैं तो उन्‍हें आइसोलेट कर उपचार प्रारम्भ किया जा सकता है। साथ ही उनके सम्पर्क में आए लोगों को ढूंढकर उन्‍हें क्‍वारंटीन करना सरल होगा।  बता दें कि अब तक दुनियाभर में इससे 4 लाख 20 हजार लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें 19 हजार लोगों की मृत्यु हो चुकी है।

South China Morning Post की रिपोर्ट के मुताबिक, हुबई प्रांत में आ चुके हैं। फरवरी के अंत तक इनमें से लगभग 43 हजार लोगों मेंं कोरोना वायरस के कोई लक्षण नहीं दिख रहे थे या थे भी तो नहीं के बराबर। इसे asymptomatic लक्षण बोला जाता है। उन्हें  क्‍वारंटीन में रखकर लगातार निगरानी की गई, लेकिन उन्हें ऑफिशियल डाटा में शामिल नहीं किया गया।

वैज्ञानिक अभी आश्‍वस्‍त नहीं हैं कि asymptomatic लक्षण होने पर बीमारी कितनी तेजी से फैलती है। इसे यूं भी समझ सकते हैं कि बिना लक्षणों के बीमार आदमी कितने लोगों में व कितनी तेजी से बीमारी फैलाता है, ये साफ नहीं हो सका है। कोरोना के मुद्दे में इनक्यूबेशन पीरियड 1 से 14 दिनों का होता है। मतलब इतने दिनों के भीतर लक्षण सामने आ जाते हैं। हालांकि भिन्न-भिन्न राष्ट्रों में ये पीरियड भिन्न-भिन्न दिनों में सामने आता है।

World Health Organisation (WHO) ने ऐसे सारे लोगों को भी एक श्रेणी में रखा है जिनमें लक्षण तो नहीं हैं लेकिन जो वायरस से संक्रमित हैं। साउथ कोरिया ने भी अपने देश में यही नियम लागू किया। लेकिन चाइना की सरकार ने 7 फरवरी को जो गाइडलाइन निकाली, उसमें उन्हीं मरीजों को कन्फर्म मरीज माना गया, जिनमें कोरोना के लक्षण दिख रहे थे। यूएस, ब्रिटेन व इटली में तो जिन लोगों में लक्षण नहीं हैं, उनका टेस्ट ही नहीं किया जा रहा है। हांगकांग में एयरपोर्ट पर ही सबका टेस्ट किया जा रहा है चाहे उनमें लक्षण हों या नहीं। इसमें ध्यान देने की बात ये है कि अमेरिका व इटली जैसे देश, जहां बिना लक्षणों के जाँच नहीं हो रही, वहां लगातार कोरोना के मुद्दे बढ़ते ही जा रहे हैं।



इसके बाद से WHO की पहले की उस रिपोर्ट पर सवाल उठ रहे हैं, जिसके अनुसार asymptomatic यानी जिनमें लक्षण नहीं हैं, उनसे बीमारी फैलना कम ही होता है। European Union की लोकल मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार खुद WHO ने माना कि चाइना में कोरोना के 1 से 3 फीसदी मामलों के लिए वही मरीज जिम्मेदार रहे।

जापान के वैज्ञानिकों के एक दल ने इसपर स्टडी की। इसके अगुआ Hiroshi Nishiura के अनुसार बहुत से ऐसे मुद्दे हैं, जिनमें बीमार लोग बिना जाँच के रह रहे हैं व बीमारी फैल रही है। इधर साउथ कोरिया में 20 फीसदी लोग बिना लक्षणों के भी कोरोना पॉजिटिव थे। सरकार ने उन सभी को अस्पताल में रखा व उपचार दिया। उन्हें तभी छोड़ा गया जब वे टेस्ट में नकारात्मक आ गए। Korea Centres for Disease Control and Prevention के डायरेक्टर Jeong Eun-kyeong कहते हैं कि कोरिया में बिना लक्षणों वाले मरीज दूसरे राष्ट्रों से बहुत ज्यादा ज्यादा नजर आ रहे हैं क्योंकि यहां पर जाँच भी सबकी हो रही है।

बिना लक्षणों के बावजूद बीमार हो चुके व बीमारी फैला रहे मरीजों का एक बहुत अच्छा उदाहरण Diamond Princess क्रूज शिप भा है। ये जापान में हफ्तों क्वेरेंटाइन में रही क्योंकि इसके सभी 712 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले, इनमें से 334 लोग वे थे जिनमें बीमारी के कोई भी लक्षण नहीं दिख रहे थे। इटली में भी 44 फीसदी मरीजों में कोई लक्षण नहीं हैं, जो वायरस के फैलने की वजह बने।

चीन, अमेरिका, ब्रिटेन व हांगकांग की संयुक्त स्टडी के नतीजे डराने वाले हैं। ये बताते हैं कि 23 जनवरी को वुहान के बंद होने से पहले वही लोग बीमारी फैलाने की वजह बने जिनमें कोई लक्षण नहीं थे। इसकी वजह से लगभग 79 फीसदी लोग गंभीर रूप से वायरस की चपेट में आ गए। इस बारे में University of Hong Kong में संक्रामक बीमारियों के एक्सपर्ट Benjamin Cowling कहते हैं कि बिना किसी लक्षण के भी लोग कोरोना पॉजिटिव हो सकते हैं व यही लोग दूसरे स्वस्थ लोगों तक वायरस ले जाते हैं।


देश में कोरोना के मरीजों की संख्या 4 हजार के हुई पार

देश में कोरोना के मरीजों की संख्या 4 हजार के हुई पार

चीन के वुहान से प्रारम्भ हुए कोरोना वायरस से दुनियाभर के कई देश बुरी तरह से प्रभावित हैं. हिंदुस्तान में भी संक्रमित मरीजों का आंकड़ा चार हजार के पार पहुंच चुका है. मरने वालों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है. वहीं, देश में कोरोना से होने वाली मौतों को लेकर पहली बार केन्द्र सरकार ने आंकड़े जारी किए हैं. 

63 प्रतिशत मौतें साठ से अधिक आयु के लोगों की हुई हैं, जबिक कोरोना संक्रमित लोगों में इस आयु के लोगों का फीसदी महज 19 प्रतिशत है. अमेरिका में साढ़े तीन लाख से भी ज्यादा कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या हो चुकी है. इसके अतिरिक्त दस हजार से भी ज्यादा की मृत्यु हुई है.